Last Updated: October 10, 2026

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महिला के लिव-इन पार्टनर पर नहीं चल सकता क्रूरता का मुकद्दमा : केरल हाईकोर्ट

July 12, 2024

महिला के लिव-इन पार्टनर पर नहीं चल सकता क्रूरता का मुकद्दमा : केरल हाईकोर्ट

कोच्चि: केरल हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी महिला का साथी जो कानूनी रूप से विवाहित नहीं है, उस पर धारा 498ए के तहत क्रूरता के अपराध का मुकद्दमा नहीं चलाया जा सकता। कोर्ट ने वीरवार को याचिकाकत्र्ता के खिलाफ कार्यवाही को रद्द करने के बाद यह फैसला सुनाया, जो शिकायतकत्र्ता महिला का लिव-इन पार्टनर था। कोर्ट ने फैसला सुनाया, धारा 498 (ए) के तहत दंडनीय अपराध के लिए सबसे आवश्यक बात यह है कि महिला के पति या पति के रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता की गई हो। पति शब्द का अर्थ है विवाहित पुरुष, जिससे महिला की शादी हुई है। विवाह से ही कोई व्यक्ति महिला के पति का दर्जा पाता है।

विवाह का अर्थ कानून की नजर में विवाह है। कानूनी विवाह के बिना यदि कोई पुरुष किसी महिला का साथी बन जाता है तो वह धारा 498 (ए) के तहत ‘पति’ नहीं कहलाएगा। आरोप यह था कि याचिकाकत्र्ता ने मार्च 2023 से अगस्त 2023 तक महिला को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया, जबकि वे लिव-इन रिलेशनशिप में थे। कोर्ट ने कहा कि धारा 498ए के तहत अपराध का मुकद्दमा चलाने के लिए जरूरी है कि क्रूरता का अपराध पति या पति के रिश्तेदारों द्वारा किया गया हो। इसमें कहा गया कि एक पुरुष जो कानूनी विवाह के बिना महिला का साथी था उस पर धारा 498ए के तहत मुकद्दमा नहीं चलाया जा सकता।

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