नेशनल डेस्क। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में बन रहे विराट रामायण मंदिर में दुनिया का एक बहुत बड़ा शिवलिंग स्थापित किया जाना है। यह विशाल शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम से बनकर बिहार की ओर लाया जा रहा है। शनिवार को यह शिवलिंग उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे गोपालगंज जिले के बलथरी चेकपोस्ट के पास पहुंच गया। जैसे ही शिवलिंग गोपालगंज पहुंचा, उसे देखने और पूजा करने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोग फूल, चंदन और जल से शिवलिंग की पूजा करते नजर आए।
ब्लैक ग्रेनाइट से बना 33 फीट ऊंचा शिवलिंग
यह विशाल शिवलिंग करीब 33 फीट ऊंचा है और इसे ब्लैक ग्रेनाइट पत्थर से तैयार किया गया है। इसका वजन लगभग 210 मीट्रिक टन है। यह शिवलिंग एक ही बड़े ग्रेनाइट पत्थर से बनाया गया है, जो भारतीय शिल्पकला की एक बेहतरीन मिसाल माना जा रहा है। इस शिवलिंग को बनाने में पूरे 10 साल का समय लगा है। इसका निर्माण तमिलनाडु के महाबलीपुरम क्षेत्र के पट्टिकाडू गांव में किया गया है, जहां दक्षिण भारत की प्रसिद्ध पत्थर नक्काशी कला देखने को मिलती है।

करीब 3 करोड़ रुपये की लागत, 96 चक्कों वाले ट्रक से लाया जा रहा
इस विशालकाय शिवलिंग को बनाने में करीब 3 करोड़ रुपये की लागत आई है। इसके भारी वजन और बड़े आकार को देखते हुए इसे लाने के लिए 96 चक्कों वाले विशेष ट्रक का इस्तेमाल किया जा रहा है। ट्रक में कई धुरियां लगी हैं ताकि शिवलिंग को सुरक्षित तरीके से ले जाया जा सके। तमिलनाडु से यह शिवलिंग कई हफ्ते पहले बिहार के लिए रवाना हुआ था और अब उत्तर प्रदेश के रास्ते बिहार में प्रवेश कर चुका है।
सावधानी से कराया जा रहा है सफर
शिवलिंग के अत्यधिक वजन और आकार के कारण इसे बहुत ही सावधानी से आगे बढ़ाया जा रहा है। गोपालगंज जिला प्रशासन के अनुसार, यह शिवलिंग अगले 50 से 60 घंटे तक गोपालगंज जिले की सीमा में ही रह सकता है, क्योंकि हर मोड़ और सड़क पर विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था में तैनात हैं ताकि किसी भी तरह की परेशानी न हो।
मोतिहारी के कैथवलिया में बन रहा विराट रामायण मंदिर
यह शिवलिंग मोतिहारी के कल्याणपुर प्रखंड के कैथवलिया गांव में बन रहे विराट रामायण मंदिर में स्थापित किया जाएगा। इस मंदिर का निर्माण बिहार राज्य धार्मिक न्यास समिति द्वारा कराया जा रहा है। इस मंदिर का शिलान्यास 20 जून 2023 को बिहार राज्य धार्मिक न्यास समिति के तत्कालीन अध्यक्ष और आईएएस अधिकारी किशोर कुणाल ने किया था।
मंदिर निर्माण का काम तेजी से जारी
शिलान्यास के बाद से अब तक मंदिर की नींव, प्रवेश द्वार, सिंह द्वार, नदी मंडप और गर्भगृह की पाइलिंग का काम पूरा किया जा चुका है। महावीर मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, यह मंदिर रामायण काल की आध्यात्मिकता और भारतीय संस्कृति को दर्शाएगा।
शिवलिंग के दर्शन के लिए उमड़ रही है भीड़
जैसे-जैसे शिवलिंग वाला ट्रक आगे बढ़ रहा है, रास्ते में लोग जगह-जगह रुककर इसके दर्शन कर रहे हैं। श्रद्धालु इसे आस्था का प्रतीक मानते हुए पूजा-अर्चना कर रहे हैं। महावीर मंदिर ट्रस्ट का कहना है कि यह शिवलिंग न सिर्फ अपने विशाल आकार के कारण खास है, बल्कि यह रामायण काल की धार्मिक और आध्यात्मिक भावना को भी दर्शाता है।