Yamuna Now be Cleaned, Master Plan Ready : नई दिल्ली। यमुना को साफ करने का मास्टर प्लान तैयार हो गया है। अब इस प्लान पर दिल्ली सरकार काम करेगी। इसके साथ ही आम नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। प्रधानमंत्री ने भी इसे जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया था। इसे ध्यान में रखकर दिल्ली के 28 घाटों पर सफाई अभियान चलाया।
नदी में नहीं डालने दी जाएंगी ये वस्तुएं
नदी में खंडित मूर्तियों और पूजन सामग्री के विसर्जन, प्लास्टिक सहित अन्य कचरा जाने से रोकने की तैयारी शुरू की गई है। प्रधानमंत्री की निगरानी में यमुना की सफाई से संबंधित परियोजनाओं का काम चल रहा है। नियमित रूप से इसकी समीक्षा की जा रही है। पिछले दिनों केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई थी। उन्होंने हरियाणा, दिल्ली व उत्तर प्रदेश सरकार को मिलकर इसके लिए काम करने का निर्देश दिया था। तीनों राज्यों में अगले वर्ष तक कुल 99एसटीपी स्थापित किए जाएंगे। दिल्ली में यमुना में गिरने वाले नालों से 28.57 लाख टन गाद निकाले गए हैं।
एक हजार करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का कहना है कि यमुना की सफाई को लेकर एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। नए एसटीपी बनाने के साथ ही आधुनिक मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। आम नागरिकों की भागीदारी भी आवश्यक है। उनके सहयोग से नदी के तट को साफ व सुंदर बनाया जाएगा। ‘मां यमुना तट स्वच्छता अभियान’ में स्कूल-काॅलेज के छात्रों के साथ ही उनके अभिभावक भी शामिल हुए। इस तरह के अभियान नियमित रूप से चलाने की आवश्यकता है। शीघ्र ही इसकी रूपरेखा घोषित की जाएगी। उन्होंने लोगों से नदी में खंडित व पुरानी मूर्तियां, पूजन सामग्री, कपड़े, प्लास्टिक के थैले आदि नहीं डालने की अपील की।
मेट्रो स्टेशनों पर जमा होंगे पुराने कपड़े
पुरानी मूर्तियों को एकत्र करने के लिए पूरे शहर में केंद्र स्थापित किए जाएंगे। मेट्रो स्टेशनों पर पुराने कपड़ों के संग्रह के लिए केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। इसी तरह से प्लास्टिक से बनी सामग्री एकत्र करने की भी व्यवस्था की जा रही है। यमुना तट पर बड़े पैमाने पर वृक्षा रोपण करने की तैयारी है। दिल्ली सरकार के जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि रविवार को मां यमुना तट स्वच्छता अभियान” में 15 हजार से अधिक नागरिकों ने भाग लिया। इस दौरान 116.6 टन कचरे को एकत्र कर वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित किया गया। सामान्य कचरे एवं निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडी) अपशिष्ट का निर्धारित मानकों के तहत निपटान किया गया, जबकि पूजा सामग्री एवं खंडित मूर्तियों का पर्यावरण अनुकूल तरीके से विसर्जन सुनिश्चित किया गया।
8 ट्रैश स्किमर भी लगाए जाएंगे
जलकुंभी और दूसरे हरित अपशिष्ट को वैज्ञानिक प्रसंस्करण के लिए निर्धारित ग्रीन वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट तक पहुंचाया गया। अभियान को प्रभावी बनाने के लिए 8 ट्रैश स्किमर और वीड हार्वेस्टर, 28 नाव और 84 पीडब्ल्यूडी मेंटेनेंस वाहन का उपयोग किया गया। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण, लोक निर्माण विभाग, दिल्ली जल बोर्ड, नगर निगम, राजस्व विभाग, दिल्ली पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड ने इसमें योगदान दिया।
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