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यमुना जल समझौते का विरोध : संपत बोले- 17 विधायकों ने दिया था इस्तीफा

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Yamuna Water Agreement : 17 MLAs had resigned : चंडीगढ़। हरियाणा और राजस्थान के बीच नए जल समझौते पर इनेलो (INLD) ने विरोध किया है। पूर्व वित्त मंत्री प्रो. संपत सिंह ने चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इनेलो-हरियाणा के जल अधिकारों से किसी भी तरह का समझौता नहीं होने देगी। इसके लिए संघर्ष करेंगे।

समझौते को बताया राज्य के खिलाफ

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की मौजूदगी में हरियाणा-राजस्थान जल समझौता राज्य के हितों के खिलाफ है। साथ ही कहा कि एसवाईएल नहर का निर्माण सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद अधूरा है, जिससे प्रदेश जल संकट झेल रहा है। प्रो. संपत सिंह ने कहा कि हरियाणा के पानी के मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस दोनों की सोच एक जैसी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने पहले सत्ता बचाने के लिए समझौता किया और अब भाजपा सरकार ने राजस्थान को पानी देने का फैसला कर हरियाणा के हितों से समझौता किया है।

ये है पानी बंटवारे का आंकड़ा

प्रो. संपत सिंह ने बताया कि 1954 के यमुना जल समझौते के बाद हरियाणा को गठन के समय पंजाब के हिस्से का अधिकार मिला था। उस समय हरियाणा करीब 8 बीसीएम और उत्तर प्रदेश 4 बीसीएम पानी का उपयोग करता था। उन्होंने कहा कि 12 मई 1994 को हुए समझौते में हरियाणा का हिस्सा घटाकर 5.730 बीसीएम कर दिया गया, जबकि राजस्थान, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश को भी स्थायी हिस्सेदारी दी गई। इससे हरियाणा की हिस्सेदारी करीब 67% से घटकर 46% रह गई।

इनेलो के सभी विधायकों ने दिए थे इस्तीफे

प्रो. संपत सिंह ने कहा कि 1994 के यमुना जल समझौते के विरोध में तत्कालीन नेता ओम प्रकाश चौटाला के नेतृत्व में इनेलो के सभी 17 विधायकों ने विधानसभा से इस्तीफा दिया था। उन्होंने इसे हरियाणा के जल अधिकारों की रक्षा के लिए दिया गया सबसे बड़ा राजनीतिक बलिदान बताया। संपत सिंह ने कहा कि 1994 के समझौते में रेणुका, किशाऊ और लखवार-व्यासी बांध बनाकर यमुना में पानी बढ़ाने का प्रावधान था, लेकिन 3 दशक के बाद भी परियोजना पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि राजस्थान ने ऊपरी क्षेत्रों में कच्चे बांध बनाकर प्राकृतिक जल प्रवाह रोक दिया।

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