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योगी का दर्द : गाय का दूध पीएंगे, सड़कों पर छोड़ देंगे… और गाली मुझे

Yogi's pain people abuse me, know how

Yogi's pain people abuse me, know how

Yogi’s pain people abuse me, know how : कानपुर। चंद्रशेखर आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय परिसर में प्राकृतिक खेती कार्यशाला में आज उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ गोवंश पर चिंता जताई। उन्होंने कहा लोग गाय का दूध तो लेते हैं, लेकिन उसे सड़कों पर छोड़ देते हैं। बाद में लोग गाली मुझे देते हैं।

पांच प्रगतिशील किसानों का सम्मान

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक खेती अपनाने वाले पांच प्रगतिशील किसानों को सम्मानित भी किया। गोसंरक्षण का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में जन्मे सभी धर्म, संप्रदाय और पंथ किसी न किसी रूप में गोमाता को सम्मान देते हैं। जब देश गुलाम था तब भी सिख वीरों ने गोहत्या करने वालों के खिलाफ संघर्ष किया था। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के निराश्रित गोआश्रय स्थलों में वर्तमान में लगभग 14 लाख गोवंशी संरक्षित हैं। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत किसान चार गोवंश अपने पास रख सकते हैं, जिसके लिए सरकार प्रति गाय 1500 रुपये प्रतिमाह की सहायता देती है।

एक देसी गाय किसानों के लिए फायदेमंद

अब तक डेढ़ लाख से अधिक किसान इस योजना से जुड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि एक देशी गाय एक वर्ष में कई एकड़ भूमि के लिए आवश्यक जैविक संसाधन उपलब्ध करा सकती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए 34 जिलों का विशेष रूप से चयन किया गया है, जिनमें बुंदेलखंड के भी सात जिले शामिल हैं। सरकार अब कृषि मंडियों में प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों के लिए अलग शोरूम स्थापित करेगी, ताकि किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिल सके।

प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पाद को दें प्राथमिकता

उन्होंने कहा कि यदि प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पाद थोड़ा महंगा भी हो तो उपभोक्ताओं को उसे प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि वह स्वास्थ्य की दृष्टि से अधिक लाभकारी होता है। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और पेस्टीसाइड के अत्यधिक उपयोग ने मिट्टी की उर्वरा शक्ति को प्रभावित किया है और लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है। लगभग 30 वर्ष पहले लोग हैंडपंप, नदी और तालाब का पानी पी लेते थे, तब किडनी, लीवर और ब्लड शुगर जैसी गंभीर बीमारियां इतनी सामान्य नहीं थीं।

खानपान से भी बीमार हो रहे लोग

आज लगभग हर मुहल्ले में ऐसे मरीज मिल जाएंगे। खानपान और कृषि उत्पादन में रसायनों की बढ़ती मात्रा भी इसके पीछे एक बड़ा कारण है। उन्होंने कहा कि व्यवस्था अन्न के नाम पर जहर परोसने का काम नहीं कर सकती, इसलिए जहरमुक्त खेती को बढ़ावा देना आवश्यक है।
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