
नेशनल डेस्क: अहमदाबाद से एक मामला सामने आया है, जिसमें आईवियर कंपनी लेंसकार्ट (Lenskart) पर एक युवक ने गंभीर आरोप लगाए हैं। युवक का कहना है कि उसे अपने धार्मिक चिन्ह हटाने के लिए कहा गया था, और जब उसने मना किया तो उसे नौकरी से निकाल दिया गया।
गुजरात के सूरत के रहने वाले जील सोगसिया ने एक वीडियो जारी कर बताया कि वह खुद को कंपनी का पूर्व कर्मचारी मानते हैं। उनके अनुसार, कंपनी की तरफ से उन्हें अपनी शिखा (चोटी) कटवाने, ‘ओम’ का टैटू हटाने और माथे पर तिलक न लगाने के लिए कहा गया था। उन्होंने कहा कि यह उनकी आस्था से जुड़ा मामला था, इसलिए उन्होंने इन बातों को मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया।
I was ordered by @Lenskart_com to cut my shikha and remove my tilak. When I refused to do so, I was fired. – Zeel Soghasia
This is blatant discrimination and bigotry that goes beyond adhering to some internal memo. Mr Soghasia must be recalled and reinstated. @peyushbansal pic.twitter.com/V4UANQE2Q1
— Anand Ranganathan (@ARanganathan72) April 18, 2026
यह मामला तब और चर्चा में आया जब Anand Ranganathan ने इस वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर शेयर किया। उन्होंने इसे भेदभाव बताया और कंपनी के CEO Peyush Bansal से मांग की कि युवक को दोबारा नौकरी पर रखा जाए। वीडियो में सोगसिया ने बताया कि उन्हें 10 दिसंबर 2025 को कंपनी की तरफ से कॉल आया था और मुंबई में ट्रेनिंग के लिए बुलाया गया था। वहां ट्रेनिंग के दौरान उन्हें “ग्रूमिंग स्टैंडर्ड्स” फॉलो करने के लिए कहा गया। उनका कहना है कि ट्रेनिंग हेड ने साफ कहा कि प्रोग्राम जारी रखने के लिए उन्हें अपने धार्मिक चिन्ह हटाने होंगे। जब उन्होंने मना किया, तो उन्हें ट्रेनिंग प्रोग्राम से बाहर कर दिया गया।
गौरतलब है कि इससे पहले भी कंपनी के ड्रेस कोड को लेकर विवाद हो चुका है। एक कथित आंतरिक दस्तावेज में कहा गया था कि ऑफिस में बिंदी और तिलक लगाने की अनुमति नहीं है, जबकि हिजाब पहनने की छूट दी गई है। इस पर काफी बहस हुई थी। हालांकि, इस विवाद पर सफाई देते हुए कंपनी के CEO पेयूष बंसल ने कहा था कि वह दस्तावेज गलत था और कंपनी की असली नीति को नहीं दिखाता।
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