
नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि प्रौद्योगिकी में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच युवाओं को नए कौशल सीखने, अपनी मौजूदा क्षमताओं को उन्नत करने और उभरती प्रौद्योगिकियों के अनुरूप खुद को ढालने की जरूरत है। शंघाई में आयोजित विश्व कौशल प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले भारतीय प्रतिभागियों के साथ बातचीत के दौरान मोदी ने भारत को कुशल मानव संसाधन का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए युवाओं, सरकार और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच समन्वित प्रयासों पर भी जोर दिया।
आधिकारिक बयान के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने युवाओं से वैश्विक बाजार की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकसित करने और अपने अनुभवों एवं सुझावों के जरिए देश की कौशल प्रशिक्षण व्यवस्था को बेहतर बनाने में योगदान देने को कहा। उन्होंने कौशल विकास के लिए अलग मंत्रालय स्थापित करने के उद्देश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि कौशल प्रशिक्षण संस्थान किसी भी तरह से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) और भारतीय प्रबंधन संस्थानों (आईआईएम) से कम महत्वपूर्ण नहीं हैं।
प्रधानमंत्री ने प्रतियोगिता में शामिल प्रतिभागियों को सरकार के साथ अपने अनुभव और सुझाव साझा करने के लिए भी प्रोत्साहित किया। विश्व कौशल प्रतियोगिता व्यावसायिक और तकनीकी कौशल के विभिन्न क्षेत्रों में युवाओं की दक्षता प्रदर्शित करने वाली प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता है। बातचीत के दौरान प्रतिभागियों ने प्रतियोगिता के अपने अनुभव साझा किए।
उन्होंने नए उपकरणों, सॉफ्टवेयर, तकनीकी प्रणालियों और कार्य प्रक्रियाओं के अनुरूप ढलने के महत्व पर चर्चा की। प्रतिभागियों ने कौशल विकास के लिए सरकार के प्रयासों से युवाओं को मिल रही मदद के बारे में भी बताया। चीन के शंघाई में 22 से 27 सितंबर तक आयोजित 48वीं विश्व कौशल प्रतियोगिता में भारत 10वें स्थान पर रहा। भारत ने 6 रजत पदक और उत्कृष्टता के लिए 20 पदक हासिल किए। इसमें भारत का अब तक का सबसे बड़ा 70-सदस्यीय दल 63 कौशल श्रेणियों में शामिल हुआ।
मेष: दिन शुभ रहेगा...