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भारत में बांग्लादेशी मिशनों के बाहर विरोध प्रदर्शन, यूनुस सरकार ने भारतीय उच्चायुक्त को भेजा समन

Yunus government summons Indian High Commissioner

Yunus government summons Indian High Commissioner

ढ़ाका: बांग्लादेश ने भारत में अपने राजनयिक मिशनों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। मंगलवार को बांग्लादेश ने नई दिल्ली और सिलीगुड़ी में हुई घटनाओं के विरोध में भारत के उच्चायुक्त को तलब किया। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि वह राजनयिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ किसी भी तरह की हिंसा या धमकी की कड़ी निंदा करता है। मंत्रालय के अनुसार, ऐसी घटनाएं न केवल राजनयिक कर्मचारियों की सुरक्षा को खतरे में डालती हैं, बल्कि देशों के बीच आपसी सम्मान, शांति और सहिष्णुता के मूल्यों को भी नुकसान पहुंचाती हैं।

विदेश मंत्रालय ने भारत सरकार से मांग की है कि इन घटनाओं की गहराई से जांच की जाए, भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों इसके लिए जरूरी कदम उठाए जाएं और भारत में मौजूद बांग्लादेशी मिशनों व उनसे जुड़ी सुविधाओं की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

कौन-कौन सी घटनाएं हुईं?

20 दिसंबर 2025: नई दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर विरोध प्रदर्शन हुआ। 22 दिसंबर 2025: सिलीगुड़ी में बांग्लादेश वीजा केंद्र में तोड़फोड़ की गई। बांग्लादेश सरकार ने कहा है कि वह उम्मीद करती है कि भारत सरकार अपने अंतरराष्ट्रीय और राजनयिक दायित्वों के तहत तुरंत जरूरी कदम उठाएगी, ताकि राजनयिक कर्मियों और प्रतिष्ठानों की गरिमा और सुरक्षा बनी रहे।

वीजा सेवाएं अस्थायी रूप से बंद

विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा कारणों से बांग्लादेश ने दिल्ली और सिलीगुड़ी में वीजा सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दी हैं। दिल्ली में लोगों के एक समूह द्वारा बांग्लादेश उच्चायोग को घेरने की घटना के बाद वीजा जारी करना रोक दिया गया। सिलीगुड़ी में, जहां वीजा का काम एक निजी एजेंसी (VFS) के जरिए होता था, वहां तोड़फोड़ और धमकियों की शिकायत के बाद सेवाएं बंद कर दी गईं।

भारत का जवाब

भारत ने सुरक्षा में चूक के आरोपों को खारिज किया है। भारत का कहना है कि नई दिल्ली में हुआ विरोध प्रदर्शन बहुत कम समय के लिए था और इससे किसी तरह का सुरक्षा खतरा नहीं था। भारत ने बांग्लादेशी मीडिया के कुछ हिस्सों में चल रही खबरों को “गुमराह करने वाला प्रचार” बताया है।

विवाद की वजह

यह पूरा मामला बांग्लादेश में 27 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की हत्या के बाद सामने आया। यह घटना मैमनसिंह में हुई थी, जिसके बाद बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई। इस घटना की कई देशों और संगठनों ने निंदा की है। यह मामला अब दोनों देशों के बीच एक संवेदनशील राजनयिक मुद्दा बन गया है।

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