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‘कांग्रेस के 20-25 MPs ओम बिरला के चैंबर में घुसे, उन्हें गालियां दीं’, किरेन रिजिजू का विपक्ष पर आरोप

Kiren Rijiju Congress Pakistani flags

Kiren Rijiju Congress Pakistani flags

नई दिल्ली: केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस सांसदों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि करीब 20 से 25 कांग्रेस सांसद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के चैंबर में गए और उनके साथ बदसलूकी की व गालियां दीं। रिजिजू के मुताबिक, सांसदों ने स्पीकर के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे वे काफी दुखी हैं।

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लोकसभा स्पीकर घटना से आहत

बुधवार को मीडिया से बातचीत में रिजिजू ने कहा कि उन्होंने खुद स्पीकर ओम बिरला से बात की है और वे इस घटना से “बहुत आहत” हैं। उन्होंने बताया कि सदन में बोलने की अनुमति को लेकर विवाद हुआ था। स्पीकर द्वारा एक रूलिंग (निर्देश) दिए जाने के बाद भी कुछ सांसदों ने उसका पालन नहीं किया।

 

संसद में नियमों का पालन जरूरी

रिजिजू ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें बोलने के लिए किसी की अनुमति की जरूरत नहीं है और वे अपनी मर्जी से बोलेंगे। इस पर रिजिजू ने कहा कि संसद में नियमों का पालन जरूरी है और बिना चेयर (स्पीकर) की अनुमति कोई भी सदस्य नहीं बोल सकता। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री को भी बोलने से पहले स्पीकर की अनुमति लेनी पड़ती है।

रिजिजू के अनुसार, घटना के दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल जैसे वरिष्ठ कांग्रेस नेता भी स्पीकर के चैंबर में मौजूद थे। उन्होंने आरोप लगाया कि ये नेता वहां मौजूद सांसदों को विरोध जारी रखने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे। रिजिजू ने कहा कि अगर स्पीकर सख्त स्वभाव के होते, तो इस मामले में कड़ी कार्रवाई हो सकती थी।

कैसे बढ़ा विवाद 

यह विवाद उस समय बढ़ा जब कांग्रेस ने मंगलवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (नो-कॉन्फिडेंस मोशन) का नोटिस दिया। लोकसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव पर चर्चा बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन, 9 मार्च को होने की संभावना है। हालांकि, सूत्रों ने यह भी बताया कि विपक्षी सांसदों द्वारा दिए गए नोटिस में कुछ तकनीकी कमियां पाई गई हैं।

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बताया जा रहा है कि नोटिस में फरवरी 2025 की घटनाओं का चार बार उल्लेख किया गया है, जो नियमों के तहत आपत्ति का कारण बन सकता था। फिर भी, स्पीकर ने सचिवालय को निर्देश दिया है कि नोटिस में मौजूद कमियों को ठीक कर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाए। यह पूरा मामला संसद के कामकाज को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच चल रहे तनाव के बीच सामने आया है, जिससे राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।

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