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अमित शाह का दावा- ‘अब शिवसेना में कोई गुट नहीं, सिर्फ एक शिवसेना है’; उद्धव गुट में बढ़ी मुश्किलें

Amit Shah News

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Amit Shah News: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि महाराष्ट्र में अब शिवसेना के अलग-अलग गुट नहीं हैं, बल्कि सिर्फ एक ही शिवसेना है और उसके नेता एकनाथ शिंदे हैं। उन्होंने कहा कि पहले एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली पार्टी को “शिवसेना शिंदे गुट” कहा जाता था, लेकिन अब यह स्थिति बदल गई है। अमित शाह कोल्हापुर में आयोजित एक धन्यवाद रैली को संबोधित कर रहे थे।

माता अंबाबाई मंदिर में पूजा-अर्चना की

इससे पहले उन्होंने माता अंबाबाई मंदिर में पूजा-अर्चना की और मंदिर के आधुनिकीकरण व सौंदर्यीकरण से जुड़े कार्यों की शुरुआत की।

ज्योतिर्लिंगों और शक्तिपीठों के पुनर्विकास पर भी काम चल रहा

अमित शाह ने कहा कि महाराष्ट्र में धार्मिक स्थलों के विकास का काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकास भी, विरासत भी” के विजन के तहत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य के ज्योतिर्लिंगों और शक्तिपीठों के पुनर्विकास पर भी काम चल रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) में अंदरूनी संकट की खबरें सामने आ रही हैं।

गैरहाजिर सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी

पार्टी के कई सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की चर्चा के बाद उद्धव गुट में तनाव बढ़ गया है। शिवसेना (UBT) की ओर से गैरहाजिर सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की गई है। पार्टी के लोकसभा चीफ व्हिप अनिल देसाई ने उन सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जो पार्टी की अहम बैठक में शामिल नहीं हुए थे। नोटिस में सांसदों से 24 घंटे के अंदर जवाब मांगा गया है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि अगर जवाब नहीं दिया गया तो इसे पार्टी की सदस्यता छोड़ने के रूप में माना जा सकता है और संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

संसदीय दल की बैठक में नहीं पहुंचे शिवसेना (UBT) सांसद 

इस विवाद के बीच दिल्ली में हुई शिवसेना (UBT) की संसदीय दल की बैठक में भी फूट दिखाई दी। पार्टी के नौ लोकसभा सांसदों में से केवल तीन सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे बैठक में पहुंचे। वहीं नागेश आष्टीकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे बैठक से दूर रहे। इस घटनाक्रम से उद्धव ठाकरे गुट पर राजनीतिक दबाव बढ़ गया है, जबकि एकनाथ शिंदे गुट खुद को महाराष्ट्र की असली शिवसेना के रूप में पेश कर रहा है।

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