नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन में बताया कि 4 फरवरी को उन्होंने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लोकसभा में न आने का अनुरोध किया था। स्पीकर ने बताया कि कुछ सांसद प्रधानमंत्री के आसन तक पहुंचकर कोई अप्रत्याशित और गंभीर घटना कर सकते हैं। स्पीकर ने कहा कि ऐसा उन्होंने सदन की गरिमा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 4 फरवरी की शाम 5 बजे लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देना था। लेकिन विपक्ष के भारी हंगामे के कारण पीएम सदन में जवाब नहीं दे सके। इसके बाद प्रधानमंत्री के बिना ही धन्यवाद प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
ऐसी घटनाएं पूरे संसदीय जीवन में कभी नहीं देखीं
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि एक दिन पहले लोकसभा में जो घटनाएं हुईं, वैसी घटनाएं उन्होंने अपने पूरे संसदीय जीवन में कभी नहीं देखीं। उन्होंने कहा कि कुछ सांसदों का व्यवहार न केवल सदन में, बल्कि अध्यक्ष के कार्यालय तक पहुंच गया, जो संसदीय परंपराओं के बिल्कुल खिलाफ है। स्पीकर ने कहा कि भारतीय संविधान ने सदन के सभापति को एक गरिमामय और सम्मानजनक स्थान दिया है, लेकिन विपक्ष के कुछ सदस्यों ने उस मर्यादा का पालन नहीं किया। उन्होंने इस घटना को संसद की परंपराओं पर “काला धब्बा” बताया।
पीएम मोदी के साथ हो सकती थी अप्रत्याशित घटना: बिरला
ओम बिरला ने आगे कहा कि जब प्रधानमंत्री को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देना था, तब उन्हें पुख्ता जानकारी मिली कि कांग्रेस के कुछ सांसद प्रधानमंत्री के आसन तक पहुंचकर कोई अप्रत्याशित और गंभीर घटना कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे दृश्य लोकतांत्रिक परंपराओं को नुकसान पहुंचाते।
मैंने पीएम से अनुरोध किया, सदन में न आएं: बिरला
स्पीकर ने बताया कि इसी आशंका के चलते उन्होंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि वे उस दिन सदन में न आएं। उनका कहना था कि सदन की गरिमा और शांति बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सदन के नेता का न बोल पाना किसी भी तरह से ठीक नहीं है, लेकिन हालात को देखते हुए यह फैसला जरूरी था। स्पीकर ओम बिरला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया कि उन्होंने उनके आग्रह को मान लिया और सदन को एक बड़े और अप्रिय घटनाक्रम से बचाया।
लोकसभा स्पीकर ने विपक्ष को दी चेतावनी
उन्होंने विपक्ष को साफ शब्दों में चेतावनी दी कि पोस्टर और पर्चे लेकर सदन में आने से कार्यवाही नहीं चल सकती। स्पीकर ने कहा कि अगर सदन की मर्यादा और परंपरा का पालन होगा, तभी संसद सुचारू रूप से चल पाएगी। स्पीकर ने यह भी कहा कि हाल की घटनाओं में जिस तरह कुछ महिला सांसद आसन के पास तक पहुंचीं, वह न तो उचित था और न ही सदन की गरिमा के अनुकूल। अंत में स्पीकर ने कहा कि विरोध भाषण और शब्दों से किया जा सकता है, लेकिन इस तरह की हरकतें स्वीकार्य नहीं हैं। इसके बाद उन्होंने लोकसभा की कार्यवाही 6 फरवरी सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

