लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्रवाई को लेकर बड़ा बयान दिया है। रविवार को लखनऊ में उत्तर प्रदेश पुलिस में नवनियुक्त कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र बांटने के लिए आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अब महिलाओं और बेटियों से छेड़छाड़ करने वालों के मन में कानून का डर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सड़क पर चल रही किसी महिला या बेटी को परेशान करने से पहले अपराधी उसके नतीजों के बारे में सोचता है। उन्होंने कहा कि अगर कोई ऐसा करने की कोशिश करता है, तो वह “अपनी मौत की सजा पर खुद हस्ताक्षर कर रहा है।” योगी ने इस बयान के जरिए अपराधियों के खिलाफ सरकार की सख्त कार्रवाई और जीरो-टॉलरेंस नीति पर जोर दिया।
UP पुलिस को लेकर बोले- देश में हो रही मॉडल की चर्चा
मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त पुलिसकर्मियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि वे ऐसी पुलिस फोर्स का हिस्सा बन रहे हैं, जिसे प्रदेश की करीब 25 करोड़ आबादी के भरोसे का प्रतीक माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर किए गए बदलावों की चर्चा देश के दूसरे हिस्सों में भी हो रही है। योगी के मुताबिक, राज्य की पुलिस ने कानून-व्यवस्था के प्रति लोगों की सोच बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
दंगों और सांप्रदायिक हिंसा को लेकर सरकार का दावा
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में उत्तर प्रदेश की मौजूदा स्थिति की तुलना 2017 से पहले के दौर से की। उन्होंने दावा किया कि पहले प्रदेश में बार-बार दंगे होते थे और कई जगह लंबे समय तक कर्फ्यू लगाया जाता था। उन्होंने अलीगढ़, मेरठ और मुजफ्फरनगर का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले सांप्रदायिक विवाद और आपराधिक गतिविधियां बड़ी चुनौती थीं। मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि उस समय माफिया का प्रभाव इतना था कि प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों के साथ-साथ न्यायपालिका से जुड़े लोगों के लिए भी स्थिति चुनौतीपूर्ण थी।
योगी ने कहा कि आज स्थिति बदल गई है और अब अपराधी खुलेआम हथियार लेकर घूमने या त्योहारों के दौरान अशांति फैलाने की हिम्मत नहीं करते। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस कभी-कभी दंगा नियंत्रण की मॉक ड्रिल करती है, ताकि सुरक्षा बल ऐसी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहें।
पुलिस भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता का दावा
मुख्यमंत्री ने पुलिस और सरकारी भर्तियों में कथित अनियमितताओं को लेकर पिछली सरकारों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पहले भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठते थे और पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आती थीं। योगी ने दावा किया कि पहले ऐसी स्थिति थी कि परीक्षा एक व्यक्ति देता था, जबकि नियुक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को मिल जाती थी। उनके मुताबिक, योग्य उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया जाता था और भर्ती प्रक्रिया में लंबे समय तक शिकायतों और जांच के बावजूद प्रभावी परिणाम नहीं निकलते थे।
2017 के बाद भर्ती व्यवस्था में सुधार का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में सत्ता संभालने के बाद उनकी सरकार ने सरकारी भर्ती प्रक्रिया में बदलाव शुरू किए। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य बिचौलियों की भूमिका खत्म करना, पेपर लीक पर रोक लगाना और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना था। उन्होंने अलग-अलग भर्ती बोर्डों, सेवा आयोगों और शिक्षा से जुड़े भर्ती तंत्र में सुधार का उल्लेख किया। योगी ने कहा कि योग्य उम्मीदवारों का निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से चयन केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी सरकारी व्यवस्था और आम लोगों के भरोसे के लिए भी महत्वपूर्ण है।
‘व्यवस्था वही है, काम करने का तरीका बदला’
मुख्यमंत्री ने अपने करीब साढ़े नौ साल के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव के लिए बाहर से अधिकारियों को लाकर सरकार चलाने की जरूरत नहीं पड़ी। उन्होंने कहा कि राज्य वही है, सरकारी विभाग और प्रशासनिक पद भी वही हैं, लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों के काम करने के तरीके और सोच में बदलाव आया है। उनके मुताबिक, इसी बदलाव ने पिछले वर्षों में प्रदेश की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कामकाज पर असर डाला है।
मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त पुलिसकर्मियों से जिम्मेदारी, ईमानदारी और जनता के भरोसे को बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि पुलिस की भूमिका केवल अपराध पर कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है, बल्कि जनता में सुरक्षा और विश्वास की भावना पैदा करना भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

