Last Updated: November 5, 2026

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राहुल गांधी के धरने पर जेपी नड्डा का हमला, बोले- ‘न्याय नहीं, मीडिया अटेंशन के लिए ड्रामा’

August 21, 2026

राहुल गांधी के धरने पर जेपी नड्डा का हमला, बोले- ‘न्याय नहीं, मीडिया अटेंशन के लिए ड्रामा’

नई दिल्ली: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। नड्डा ने संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर राहुल गांधी के धरने को ‘सस्ती और ध्यान खींचने वाली राजनीति’ बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन न छात्रों के लिए है और न ही न्याय की मांग के लिए, बल्कि कांग्रेस की राजनीतिक हताशा और राहुल गांधी की मीडिया में बने रहने की कोशिश है।

जेपी नड्डा ने कहा कि 20 जुलाई को हुई घटना को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही कार्रवाई कर चुका है। अदालत ने इस मामले की जांच के लिए रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में पांच सदस्यों वाली हाई-पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी (HPEC) बनाई है। ऐसे में राहुल गांधी का पुलिस स्टेशन के बाहर बैठना समझ से परे है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सुप्रीम कोर्ट इस मामले की जांच कर रहा है, तो राहुल गांधी कैमरों के सामने धरना देकर क्या साबित करना चाहते हैं। नड्डा ने कहा कि इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या विपक्ष के नेता को देश की न्यायपालिका पर भरोसा नहीं है।

‘वंदे मातरम’ विवाद से ध्यान भटकाने का आरोप

नड्डा ने राहुल गांधी के प्रदर्शन को कांग्रेस के सामने चल रहे ‘वंदे मातरम’ विवाद से भी जोड़ दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस मुद्दे पर आलोचना का सामना कर रही है और राहुल गांधी का धरना जनता का ध्यान दूसरी ओर ले जाने की कोशिश है। नड्डा ने कांग्रेस पर राष्ट्रगीत के अपमान को लेकर सवाल उठाए और एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता द्वारा तिरंगे जैसा दिखने वाला केक काटे जाने की घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी इस कथित परेशानी से ध्यान हटाने के लिए राहुल गांधी के धरने को राजनीतिक मुद्दा बना रही है।

साहिल लोचव ने FIR दर्ज करने की मांग की

इस पूरे मामले की शुरुआत 20 जुलाई की घटना से जुड़ी शिकायत को लेकर हुई है। पैलेट गन से घायल होने का दावा करने वाले साहिल लोचव ने संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में कहा कि उनकी शिकायत पर अब तक FIR दर्ज नहीं की गई है। साहिल के मुताबिक, 20 जुलाई को उन पर पैलेट गन से गोली चलाई गई थी। उन्हें पहले लेडी हार्डिंग अस्पताल ले जाया गया, जहां से AIIMS रेफर किया गया। AIIMS में उनकी सर्जरी हुई, लेकिन उनका कहना है कि उनकी आंखों की रोशनी अभी भी पूरी तरह साफ नहीं हुई है। साहिल ने बताया कि उन्होंने 14 अगस्त को सात पन्नों की शिकायत लिखकर अपने वकील को दी थी, लेकिन उनका आरोप है कि पुलिस ने अब तक FIR दर्ज नहीं की।

कांग्रेस की मांग- ‘FIR दर्ज करो और नंबर दो’

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि पार्टी की मांग बिल्कुल स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि साहिल लोचव की शिकायत पर FIR दर्ज की जानी चाहिए और शिकायतकर्ता को FIR नंबर दिया जाना चाहिए। जयराम रमेश के मुताबिक, राहुल गांधी इसी मांग को समर्थन देने के लिए संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि साहिल पुलिस द्वारा पैलेट गन के कथित इस्तेमाल को लेकर FIR चाहते हैं और राहुल गांधी का कहना है कि जब तक नई FIR दर्ज नहीं होती, तब तक वे वहां से नहीं जाएंगे। कांग्रेस का कहना है कि उसका प्रदर्शन संविधान के तहत मिलने वाले अधिकारों के अनुसार है।

सुप्रीम कोर्ट ने बनाई पांच सदस्यीय कमेटी

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोपों की जांच के लिए पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी बनाई है। इस कमेटी की अध्यक्षता रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं। कमेटी में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व जस्टिस शलिंदर कौर, CBI के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व DGP एलआर बिश्नोई भी शामिल हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने कहा कि कमेटी प्रदर्शनकारियों और पुलिस अधिकारियों की ओर से की गई अलग-अलग शिकायतों की जांच करेगी।

पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की हिंसा दोनों की जांच

सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी को खास तौर पर पुलिस द्वारा जरूरत से ज्यादा बल इस्तेमाल किए जाने, प्रदर्शनकारियों की ओर से हिंसा और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार जैसे आरोपों की जांच को प्राथमिकता देने को कहा है। कमेटी यह भी देख सकती है कि प्रदर्शन के दौरान घायल हुए लोगों को अंतरिम मुआवजा दिया जाना चाहिए या नहीं। इसमें पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी, दोनों शामिल हैं। अदालत ने यह भी कहा है कि कमेटी की जांच केवल एक बार की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी। उसे समय-समय पर अंतरिम रिपोर्ट देनी होगी, ताकि सुप्रीम कोर्ट स्थिति की समीक्षा कर सके और जरूरत पड़ने पर आगे के निर्देश जारी कर सके।

CCTV और बॉडी-कैमरा फुटेज भी जांच का हिस्सा

सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन से जुड़े CCTV फुटेज और पुलिस तथा सुरक्षा बलों के बॉडी-कैमरा फुटेज को सुरक्षित रखने का आदेश पहले ही दिया था। अब इन रिकॉर्डिंग को जांच के लिए हाई-पावर्ड कमेटी को सौंपने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कमेटी के गठन का मतलब यह नहीं है कि पुलिस या सुरक्षा एजेंसियां नियम तोड़ने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय या अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं कर सकतीं। यदि किसी अधिकारी को नियमों का उल्लंघन करते पाया जाता है, तो उसके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।

इस तरह एक ओर कांग्रेस साहिल लोचव की शिकायत पर FIR दर्ज करने की मांग को लेकर राहुल गांधी के धरने को न्याय की लड़ाई बता रही है, वहीं बीजेपी इसे राजनीतिक दिखावा और मीडिया का ध्यान खींचने की कोशिश बता रही है। मामले की तथ्यात्मक जांच अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में बनी हाई-पावर्ड कमेटी करेगी।

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