नई दिल्ली: अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे में कथित गड़बड़ी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने इस पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में CBI से जांच कराने की मांग की है।
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह मामला केवल पैसों की हेराफेरी का नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है। उनका कहना है कि अगर चढ़ावे में किसी तरह की गड़बड़ी हुई है, तो इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच पर भी सवाल उठाए।
SIT की जांच केवल औपचारिकता बनकर रह गई
श्रीनेत ने आरोप लगाया कि SIT की जांच केवल औपचारिकता बनकर रह गई है और इसकी प्रगति की जानकारी जनता के सामने नहीं लाई जा रही है। कांग्रेस नेता ने मांग की कि SIT की पूरी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि लोगों को सच्चाई का पता चल सके। उनका आरोप है कि अब तक केवल छोटे स्तर के लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई है, जबकि मामले में शामिल बड़े लोगों पर कोई कदम नहीं उठाया गया।
करोड़ों राम भक्तों की भावनाएं आहत हुई
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि इस कथित हेराफेरी से करोड़ों राम भक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी करने वालों ने “महमूद गजनवी को भी पीछे छोड़ दिया है।” उन्होंने इस टिप्पणी के जरिए मामले की गंभीरता को रेखांकित किया। इतिहास के अनुसार, महमूद गजनवी एक आक्रमणकारी था, जिसने गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर पर हमला कर वहां की संपत्ति लूटी थी। कांग्रेस नेता ने इसी संदर्भ का उल्लेख करते हुए कथित आरोपियों की तुलना की।
BJP-RSS पर निशाना साधा
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी निशाना साधते हुए कहा कि राम मंदिर के प्रबंधन से जुड़े ट्रस्ट में उनके समर्थकों की मौजूदगी है। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि SIT जांच की जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है, संदिग्ध लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है और इस पूरे मामले पर प्रधानमंत्री की ओर से अब तक कोई बयान क्यों नहीं आया।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में CBI जांच की मांग
कांग्रेस ने मांग की है कि मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में CBI से कराई जाए, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।

