दिसपुर: असम सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की दूसरी शादी को लेकर सख्त कदम उठाने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि अगर कोई सरकारी कर्मचारी पहली पत्नी से कानूनी तौर पर तलाक लिए बिना दूसरी शादी करता है, तो उसकी सैलरी का 20 प्रतिशत हिस्सा पहली पत्नी के खाते में भेजा जाएगा।
यह रकम पहली पत्नी के अनुरोध के बाद ट्रांसफर किए जाने की बात कही गई है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार इस तरह के प्रावधान को प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों तक भी लागू करने की संभावनाओं पर विचार कर रही है।
दूसरी शादी पर पहले से है रोक
असम में बहुविवाह पर रोक लगाने के लिए सरकार पहले ही कानून ला चुकी है। 2026 में राज्य विधानसभा ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) विधेयक पारित किया, जिसमें बहुविवाह पर रोक का प्रावधान है। हालांकि, अनुसूचित जनजातियों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य ऐसी शादियों पर रोक लगाना और पहली पत्नी के अधिकारों की रक्षा करना है।
सरकारी कर्मचारियों पर पहले भी हुई है कार्रवाई
हिमंत सरकार इससे पहले भी सरकारी कर्मचारियों की पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर सख्त रुख अपना चुकी है। माता-पिता की अनदेखी करने वाले कर्मचारियों की सैलरी से हिस्सा काटकर उनके माता-पिता को देने की व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया था। अब दूसरी शादी से जुड़े इस प्रस्तावित कदम के जरिए सरकार पहली पत्नी को आर्थिक सुरक्षा देने की कोशिश कर रही है।
असम में बहुविवाह को लेकर क्या है नियम?
असम सरकार ने 2025 में बहुविवाह पर रोक लगाने के लिए विधेयक को मंजूरी दी थी। इसके तहत जीवित जीवनसाथी के रहते या कानूनी तलाक के बिना दूसरी शादी पर रोक लगाने का प्रावधान किया गया था। बाद में 2026 के UCC कानून में भी बहुविवाह पर प्रतिबंध शामिल किया गया।
हालांकि, इस मामले में 20 प्रतिशत सैलरी कटौती का नया प्रावधान किस प्रक्रिया और किन परिस्थितियों में लागू होगा, इसकी विस्तृत आधिकारिक नियमावली अभी स्पष्ट होना बाकी है। सरकार का मानना है कि आर्थिक कार्रवाई के डर से सरकारी कर्मचारियों में बिना कानूनी तलाक के दूसरी शादी करने के मामलों पर लगाम लगाई जा सकेगी।

