पंजाब डेस्क: पंजाब की राजनीति में इन दिनों काफी हलचल है। हरभजन सिंह जो पहले आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद थे और अब भाजपा में शामिल हो गए हैं, उनके खिलाफ लोगों का गुस्सा सामने आ रहा है। उनके घर की दीवार पर किसी ने काले रंग से “पंजाब का गद्दार” लिख दिया।
इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कुछ लोग स्प्रे पेंट से यह लिखते दिख रहे हैं। मौके पर पुलिस मौजूद थी, लेकिन उन्हें रोकने की ज्यादा कोशिश नहीं दिखी। दूसरी तरफ, आम आदमी पार्टी (AAP) के कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने काली पट्टी बांधकर अपना गुस्सा जताया और पार्टी छोड़कर भाजपा में जाने वाले नेताओं के खिलाफ नारेबाजी की।
भगवंत मान ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को ‘गद्दार’ बताया
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भी इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को “गद्दार” बताया और कहा कि उन्होंने न सिर्फ पार्टी, बल्कि पंजाब की जनता के भरोसे को भी तोड़ा है। मुख्यमंत्री ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह पंजाब में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए दूसरी पार्टियों के नेताओं को तोड़ रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा डर, लालच और दबाव का इस्तेमाल करके AAP को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
#WATCH | Jalandhar, Punjab: AAP workers express their resentment against Rajya Sabha MP Harbhajan Singh as they wrote “Gaddar” on the walls of his residence in Jalandhar.
Raghav Chadha, Harbhajan Singh, along with 2/3rd MPs of AAP, merged with the BJP yesterday. pic.twitter.com/PGiFKwlt0I
— ANI (@ANI) April 25, 2026
भगवंत मान ने यह भी कहा कि भाजपा को पंजाब और यहां के लोगों से परेशानी है। उनके अनुसार, जब से पंजाब में AAP की सरकार बनी है, तब से केंद्र सरकार राज्य के विकास में रुकावट डाल रही है, जैसे कि ग्रामीण विकास के लिए मिलने वाली फंडिंग रोकना। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा देशभर में क्षेत्रीय पार्टियों को कमजोर करने की रणनीति अपनाती है। उदाहरण के तौर पर उन्होंने पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की राजनीति का जिक्र किया।
अपने निजी फायदे के लिए पार्टी छोड़ दी- मान
पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर तंज कसते हुए मान ने कहा कि उन्हें बिना मेहनत किए बड़े पद मिल गए, लेकिन बाद में उन्होंने अपने निजी फायदे के लिए पार्टी छोड़ दी। उन्होंने साफ कहा कि कुछ नेताओं के जाने से पार्टी या पंजाब पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह राजनीतिक टकराव और बढ़ सकता है।

