नई दिल्ली: मानसून सत्र के दौरान संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार तीखी बहस देखने को मिल रही है। इसी बीच भाजपा सांसद कंगना रनौत ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कई गंभीर आरोप लगाए।
कंगना ने कहा कि राहुल गांधी अपने बयानों के जरिए देश और संसद का मजाक बना रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी के उस रुख पर भी सवाल उठाया, जिसमें वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से किसी मुद्दे पर जवाब मांगते हैं, लेकिन साथ ही यह कहते हैं कि वह उनका जवाब सुनने के लिए सदन में नहीं आए हैं।
‘राहुल गांधी संसद का अपमान कर रहे’
कंगना रनौत ने कहा कि उन्होंने पहली बार संसद को इस तरह मजाक का विषय बनते देखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के लिए हर मुद्दा मजाक बन गया है और उनके व्यवहार में अब शर्म या मर्यादा जैसी कोई बात नहीं बची है। भाजपा सांसद ने कहा कि राहुल गांधी के इस रवैये को पूरी दुनिया देख रही है और लोग उनके व्यक्तित्व पर सवाल उठा रहे हैं।
राहुल गांधी के राजनीतिक भविष्य पर टिप्पणी
कंगना ने राहुल गांधी के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह राहुल गांधी अपनी निराशा जाहिर कर रहे हैं और संसद की कार्यवाही को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं, उससे उन्हें लगता है कि नेता प्रतिपक्ष के रूप में राहुल गांधी का यह आखिरी कार्यकाल हो सकता है। कंगना ने यह भी कहा कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, जबकि नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने हैं और उन्हें चुनाव में जनता का समर्थन मिला है।
‘राहुल को लगता है उनके अलावा किसी का अस्तित्व नहीं’
कंगना ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी को लगता है कि देश में उनके अलावा किसी और का अस्तित्व नहीं होना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी पर राजनीतिक निराशा निकालने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी सोच लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सही नहीं है।
राहुल गांधी के नेतृत्व पर भी सवाल
कंगना ने विपक्ष में राहुल गांधी के नेतृत्व पर भी सवाल उठाया। उन्होंने राहुल गांधी के परिवार और राजनीतिक पृष्ठभूमि को लेकर टिप्पणी करते हुए पूछा कि अगर उनकी मां उन्हें विपक्ष का नेता नहीं बनाना चाहतीं, तो उनका राजनीतिक वजूद क्या रहता। उन्होंने राहुल गांधी पर चुनावी प्रदर्शन को लेकर भी निशाना साधा और दावा किया कि वह कई चुनाव हार चुके हैं। कंगना के इन बयानों के बाद संसद के मानसून सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के संकेत हैं।

