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Jantar Mantar violence case: स्वतंत्र भारद्वाज को कोर्ट से राहत, तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत मंजूर

Independent Bharadwaj granted interim bail for three weeks by court

Independent Bharadwaj granted interim bail for three weeks by court

नई दिल्ली: पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार को खुद को ‘इन्फ्लुएंसर’ बताने वाले स्वतंत्र भारद्वाज को तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दे दी। भारद्वाज जंतर-मंतर पर एक विरोध प्रदर्शन के दौरान एक नाबालिग एक्टिविस्ट के पिता के साथ कथित मारपीट के मामले में न्यायिक हिरासत में हैं।

पटियाला हाउस कोर्ट के एडिशनल सेशन जज सौरभ प्रताप सिंह लालर ने भारद्वाज को अंतरिम राहत देने का आदेश दिया। यह घटनाक्रम कोर्ट द्वारा भारद्वाज की रेगुलर जमानत अर्जी पर आदेश सुरक्षित रखने के एक दिन बाद हुआ है। सोमवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा था कि क्या कथित घटना के समय भारद्वाज ने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया था। अभियोजन पक्ष ने कहा था कि शुरुआती शिकायत में ऐसी किसी भाषा के इस्तेमाल का जिक्र नहीं था और यह आरोप बाद में लगाया गया जब शिकायतकर्ता का बयान दोबारा दर्ज किया गया, जिसके बाद एफआईआर में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं जोड़ी गईं।

भारद्वाज के वकील ने जमानत की मांग की थी जबकि अभियोजन पक्ष ने अर्जी का विरोध किया। भारद्वाज पर जुलाई में जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन के दौरान एक नाबालिग प्रदर्शनकारी के पिता संजय कुमार के साथ मारपीट करने का आरोप है। पुलिस ने पहले कहा था कि पीड़ित को लगी चोटें ‘मामूली’ थीं और कथित तौर पर स्टील के ब्रेसलेट से लगी थीं। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम और आपराधिक धमकी से संबंधित धाराओं को शामिल किया गया है। यह घटनाक्रम पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा भारद्वाज की जमानत अर्जी पर समय से पहले सुनवाई करने से इनकार करने और इसे 14 सितंबर के लिए सूचीबद्ध करने के कुछ दिनों बाद हुआ है।

स्वतंत्र भारद्वाज को 4 सितंबर को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में हिरासत में लिया गया था, जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रतिनिधियों ने दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की और उनकी गिरफ्तारी की मांग की थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले भारद्वाज द्वारा कथित मारपीट के मामले में अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए दायर ‘हेबियस कॉर्पस’ (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका को खारिज कर दिया था। जस्टिस नवीन चावला और रविंदर डुडेजा की बेंच ने याचिका को तब खारिज कर दिया जब दिल्ली पुलिस ने कहा कि यह सुनवाई योग्य नहीं है क्योंकि भारद्वाज को पहले ही न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका था।

सीजेपी ने हत्या के प्रयास का आरोप लगाने की भी मांग की थी, जिस पर पुलिस ने कहा कि विशेषज्ञ की मेडिकल राय लेने के बाद इस प्रावधान पर विचार किया जाएगा। नाबालिग एक्टिविस्ट की शिकायत पर भारद्वाज के खिलाफ ‘प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज’ (पॉक्सो) एक्ट के तहत एक अलग एफआईआर भी दर्ज की गई। एक्टिविस्ट ने ऑनलाइन रेप की धमकी और उत्पीड़न का आरोप लगाया था।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक कथित वायरल वीडियो सामने आया, जिसमें भारद्वाज ने कथित तौर पर दावा किया कि जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान उन्होंने नाबालिग एक्टिविस्ट के पिता के साथ मारपीट की थी और यह भी कहा कि उन्हें उनके ‘राजनीतिक संपर्कों’ की वजह से छोड़ दिया गया था। बाद में भारद्वाज ने मीडिया को बताया कि उन्होंने कथित तौर पर आत्मरक्षा में ऐसा किया था।

केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी-रामविलास (एलजेपी-आरवी) के प्रमुख चिराग पासवान ने कहा था कि उस कथित वीडियो में भारद्वाज ने उनके नाम का ‘गलत इस्तेमाल’ किया। पासवान ने कहा था कि उन्होंने भारद्वाज के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है और वे नाबालिग पीड़िता और उसके परिवार को न्याय दिलाना सुनिश्चित करेंगे।

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