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भारत-पाक नहीं यहां से निकलती है सिंधू नदी… जानिए क्या है सिंधू जल समझौता

नेशनल डेस्क : जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक दर्दनाक आतंकी हमले में 27 निर्दोष नागरिकों की मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हमले के पीछे पाकिस्तान समर्थित आतंकियों का हाथ बताया जा रहा है। इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव और गहराता जा रहा है। वहीं अब भारत सरकार ने 1960 के सिंधू जल समझौते को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। इसके साथ ही भारत में रह रहे सभी पाकिस्तानियों को यह निर्देश दिया है कि वह जल्द से जल्द भारत को छोड़ दें। इसके अलावा अटारी एकीकृत चेक पोस्ट को तत्काल प्रभाव से बंद किया जा रहा है, जो लोग वैध दस्तावेजों के साथ इस मार्ग से भारत आए हैं, वे 1 मई से पहले लौट सकते हैं। इस बीच आज हम यह जानेंगे की सिंधू नदी का उद्गम स्थल कहां है और क्या है सिंधू जल समझौता…

सिंधु नदी कहां से निकलती है?

आपको बता दें कि सिंधु नदी की उत्पत्ति तिब्बत के इलाके में स्थित मानसरोवर झील के पास से होती है। यह क्षेत्र अब चीन के नियंत्रण में है। वहां से यह नदी भारत के लद्दाख क्षेत्र में प्रवेश करती है और जम्मू-कश्मीर से होकर पाकिस्तान में दाखिल होती है। पाकिस्तान में बहते हुए यह नदी सिंध और पंजाब जैसे इलाकों को सींचती है और अंत में अरब सागर में जाकर मिल जाती है। भारत में इस नदी का लगभग 1,000 किलोमीटर हिस्सा है, जबकि पाकिस्तान में यह लगभग 2,000 किलोमीटर से भी ज़्यादा बहती है। सिंधु नदी भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण जलस्रोत मानी जाती है।

क्या है सिंधु जल समझौता?

सिंधु जल समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच एक ऐतिहासिक संधि है, जिसे 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में तैयार किया गया था। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर स्पष्ट नियम बनाना था ताकि जल को लेकर विवाद ना हों। इस संधि के तहत, भारत को तीन पूर्वी नदियाँ – रावी, ब्यास और सतलुज – दी गईं, जिनका पानी वह पूरी तरह से इस्तेमाल कर सकता है। वहीं पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियाँ – सिंधु, झेलम और चिनाब – दी गईं। भारत इन पश्चिमी नदियों का उपयोग सीमित स्तर पर सिंचाई, बिजली उत्पादन और घरेलू उपयोग के लिए कर सकता है, लेकिन वह इन नदियों के बहाव को रोक नहीं सकता।

क्यों खास है यह समझौता?

यह समझौता इसलिए भी विशेष माना जाता है क्योंकि यह भारत और पाकिस्तान के बीच हुए कई युद्धों और तनावपूर्ण हालातों के बावजूद लागू रहा। दुनियाभर में इसे एक सफल जल समझौते का उदाहरण माना जाता है, क्योंकि यह दोनों देशों के बीच पानी के मुद्दे को काफी हद तक शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाता रहा है।

अब क्यों बढ़ी है तनाव की स्थिति?

हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को निलंबित करने का फैसला लिया है। भारत का मानना है कि पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन दे रहा है, और ऐसे में भारत अब इस संधि की समीक्षा कर रहा है। भारत ने यह कदम उठाकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि जब तक पाकिस्तान शांति की राह पर नहीं आता, तब तक  भारत उसके लिए पानी बंद रखेगा।

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