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‘प्रधानमंत्री चुप्पी तोड़ें’, जयराम रमेश ने राम मंदिर दान विवाद पर PM मोदी से मांगी जवाबदेही

Ram Temple donation controversy

Ram Temple donation controversy

Jairam Ramesh accountability from PM Modi, नई दिल्ली: अयोध्या के राम मंदिर दान (डोनेशन) में कथित गड़बड़ी को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। रविवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले पर चुप्पी तोड़ने और जवाब देने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान के साथ कथित तौर पर धोखा हुआ है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे गए संयुक्त पत्र का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय मामलों की स्वतंत्र और पूरी जांच की मांग की है। अपने पोस्ट में जयराम रमेश ने लिखा कि “चंदा चोरी, आस्था से धोखा” जैसे गंभीर आरोपों पर प्रधानमंत्री को अब जवाब देना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि 5 फरवरी 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन की घोषणा की थी। रमेश ने कहा कि जब ट्रस्ट के गठन का श्रेय प्रधानमंत्री ने लिया था, तो अब उस ट्रस्ट पर लगे आरोपों पर भी उन्हें अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

खड़गे और राहुल गांधी का पीएम मोदी को पत्र

इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में आरोप लगाया था कि राम मंदिर ट्रस्ट में श्रद्धालुओं के दान को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। उन्होंने कहा कि लाखों लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई आस्था और विश्वास के साथ मंदिर में दान की थी और यदि उसमें किसी तरह की गड़बड़ी हुई है, तो यह भक्तों के भरोसे के साथ धोखा है। पत्र में यह भी कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद संसद में ट्रस्ट बनाने की घोषणा प्रधानमंत्री ने की थी और ट्रस्ट के सदस्यों की नियुक्ति सरकार की ओर से की गई थी। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि ट्रस्ट के कई सदस्य RSS, VHP और उनसे जुड़े संगठनों से जुड़े रहे हैं।

 

साथ ही, उन्होंने ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का भी उल्लेख किया, जिन्होंने कथित दान गड़बड़ी की जांच के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। खड़गे और राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि इस मामले में पारदर्शिता दिखाई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने मांग की कि ट्रस्ट के सभी वित्तीय लेन-देन की स्वतंत्र जांच कराई जाए। इसमें नकद दान, सोना, चांदी और अन्य चढ़ावे की पूरी जांच शामिल हो। साथ ही जांच पूरी होने के बाद उसकी रिपोर्ट और ट्रस्ट के खातों को सार्वजनिक किया जाए, ताकि श्रद्धालु जान सकें कि उनके दान का उपयोग कैसे किया गया।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे उसका पद या प्रभाव कितना भी बड़ा क्यों न हो। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार और ट्रस्ट की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह इस मामले में कितनी पारदर्शिता और तेजी से कार्रवाई करती है। यह पत्र संसद के मानसून सत्र शुरू होने से ठीक एक दिन पहले सामने आया है। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है और माना जा रहा है कि कांग्रेस इस मुद्दे को संसद में भी उठाएगी। इस बीच, दान में कथित हेराफेरी की जांच कर रही पुलिस और स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) लगातार कार्रवाई कर रही है।

टीनू यादव और मनीष यादव को पुलिस रिमांड

शुक्रवार को एक स्थानीय अदालत ने इस मामले के दो आरोपियों राम शंकर यादव उर्फ टीनू यादव और मनीष यादव को पुलिस रिमांड पर भेज दिया। इससे पहले पुलिस ने दोनों से पूछताछ के लिए अदालत से रिमांड की मांग की थी। इसके अलावा, इस मामले में गिरफ्तार दो अन्य आरोपियों सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, जो एक सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी हैं और मंदिर में नकदी गिनने की व्यवस्था की निगरानी करते थे, तथा रमाशंकर मिश्रा से भी पुलिस ने पूछताछ की है। SIT की शुरुआती जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच लगे CCTV कैमरों में करीब 70 संदिग्ध घटनाएं दर्ज हुईं। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ कर्मचारियों को नकदी की गड्डियां छिपाते हुए देखा गया है।

जांच में यह भी सामने आया कि कर्मचारियों की एंट्री और एग्जिट पर तलाशी नहीं ली जाती थी, निजी सामान की पर्याप्त जांच नहीं होती थी और कई दान पेटियों की नकदी एक साथ गिनी जाती थी। इन्हीं कमियों के कारण कथित गड़बड़ी की संभावना बनी। रिपोर्ट के मुताबिक, जांच शुरू होने से पहले कुछ कर्मचारियों के पास से करीब 78.94 लाख रुपये बरामद किए गए थे। वहीं, 4 जून 2026 को काउंटिंग रूम से जुड़े एक बाथरूम से 2.25 लाख रुपये नकद मिलने का भी दावा किया गया है। फिलहाल इस पूरे मामले की जांच जारी है। वहीं, कांग्रेस लगातार इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाब और स्वतंत्र जांच की मांग कर रही है, जबकि जांच एजेंसियां कथित वित्तीय अनियमितताओं की तह तक पहुंचने में जुटी हुई हैं।

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