Last Updated: October 16, 2026

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चीनी की बढ़ती कीमतों पर खड़गे ने केंद्र को घेरा, पूछा- ‘यह कैसा आत्मनिर्भर भारत?’

August 22, 2026

चीनी की बढ़ती कीमतों पर खड़गे ने केंद्र को घेरा, पूछा- ‘यह कैसा आत्मनिर्भर भारत?’

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने देश में चीनी की बढ़ती कीमतों और कम होते स्टॉक को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण त्योहारों से पहले आम लोगों पर महंगी चीनी का बोझ बढ़ रहा है। खड़गे ने सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दावे पर भी सवाल उठाए।

खड़गे ने मोदी सरकार से तीन सवाल पूछे

खड़गे ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर केंद्र सरकार से तीन सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल भारत में चीनी का स्टॉक नौ साल के सबसे निचले स्तर पर क्यों पहुंच गया है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि देश को चीनी का निर्यात रोकने और करीब 10 लाख टन चीनी ड्यूटी-फ्री आयात करने की स्थिति क्यों बनी। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पिछले तीन महीनों में चीनी की कीमत करीब 40 प्रतिशत बढ़ गई है। ऐसे में त्योहारों के समय आम जनता पर बढ़ी कीमतों का बोझ क्यों डाला जा रहा है, इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

खड़गे ने सरकार की इथेनॉल नीति पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि जब देश में चीनी की कमी बताई जा रही है और विदेश से चीनी मंगानी पड़ रही है, तो E20 पेट्रोल के लिए इथेनॉल बनाने में गन्ने और अनाज के इस्तेमाल की नीति की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि एक तरफ चीनी उत्पादन और स्टॉक में कमी है, वहीं दूसरी तरफ गन्ने को इथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

सरकार ने खड़गे के आरोपों को बताया गलत

केंद्र के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने शुक्रवार को चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर सफाई दी। मंत्रालय के अनुसार, खुदरा बाजार में चीनी की कीमत 20 जुलाई को करीब 48.18 रुपये प्रति किलो थी, जो 20 अगस्त को बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो हो गई। सरकार ने कहा कि इस बढ़ोतरी के लिए केवल इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के डायवर्जन को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। मंत्रालय के मुताबिक, इथेनॉल के लिए डायवर्ट की गई चीनी का हिस्सा 2022-23 में करीब 12 प्रतिशत था, जो 2025-26 में घटकर करीब 9 प्रतिशत रह गया है। साथ ही, देश में इथेनॉल का लगभग तीन-चौथाई उत्पादन अब अनाज, खासकर मक्के से किया जा रहा है।

चीनी महंगी होने के पीछे कई कारण

सरकार ने चीनी की कीमत बढ़ने के कई कारण बताए हैं। इनमें उम्मीद से कम घरेलू उत्पादन, त्योहारों से पहले मांग में बढ़ोतरी, मौसम की वजह से गन्ने की फसल को नुकसान, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई की कमी, सट्टेबाजी और जमाखोरी शामिल हैं। सरकार के अनुसार, मौजूदा चीनी सीजन में देश में करीब 306 लाख मीट्रिक टन (LMT) चीनी उत्पादन होने का अनुमान है। पहले इसका अनुमान करीब 343 LMT लगाया गया था। रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों तथा ज्यादा बारिश के कारण खेतों में पानी भरने से गन्ने की फसल प्रभावित हुई है। हालांकि, मंत्रालय का कहना है कि अक्टूबर में नया पेराई सीजन शुरू होने तक देश की घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी स्टॉक उपलब्ध है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चीनी की कीमत बढ़ी

चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी केवल भारत तक सीमित नहीं है। सरकार के मुताबिक, खराब मौसम के कारण 2026-27 में वैश्विक स्तर पर करीब 33 LMT चीनी की कमी रहने का अनुमान है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमत 30 जून को करीब 474 अमेरिकी डॉलर प्रति टन थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर 552 डॉलर प्रति टन हो गई। यानी दो महीने से भी कम समय में कीमत में 16 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई।

जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट

सरकार ने घरेलू बाजार में कृत्रिम कमी और जमाखोरी रोकने के लिए कुछ कदम भी उठाए हैं। डीलरों के लिए 30 नवंबर तक 400 टन की स्टॉक सीमा लागू रहेगी। वहीं, थोक उपभोक्ताओं पर 1 सितंबर से 15 दिन की होल्डिंग सीमा लागू की जाएगी। केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त टीमें चीनी मिलों में उपलब्ध स्टॉक की जांच भी कर रही हैं, ताकि जमाखोरी या कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिशों पर रोक लगाई जा सके।

इस मुद्दे पर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी है। जहां खड़गे ने बढ़ती कीमतों को सरकार की नीतियों से जोड़कर सवाल उठाए हैं, वहीं केंद्र का कहना है कि कीमतों में वृद्धि के पीछे कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारण हैं और इथेनॉल नीति को इसका मुख्य कारण बताना सही नहीं है।

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