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‘लद्दाख बौद्ध संस्कृति और करुणा की जीवित मिसाल’, लेह में बुद्ध पूर्णिमा पर अमित शाह का संदेश

'Ladakh a living example of Buddhist culture and compassion', Amit Shah

'Ladakh a living example of Buddhist culture and compassion', Amit Shah

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लेह में बुद्ध पूर्णिमा के मौके पर एक कार्यक्रम में कहा कि लद्दाख सिर्फ एक जगह नहीं है, बल्कि यह बौद्ध संस्कृति, करुणा और ज्ञान की जीवित मिसाल है। उन्होंने बताया कि भारत की सभ्यता हमेशा से दुनिया को शांति और सद्भाव का संदेश देती आई है। लद्दाख जैसे इलाकों ने सदियों तक इस ज्ञान और परंपराओं को संभालकर रखा है।

दलाई लामा का जिक्र

अमित शाह ने दलाई लामा का जिक्र करते हुए कहा कि वे भी लद्दाख को एक “जीती-जागती प्रयोगशाला” मानते हैं, जहां बौद्ध धर्म के मूल्यों जैसे दया और शांति को आज भी जिया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस साल की बुद्ध पूर्णिमा खास है क्योंकि 75 साल बाद पवित्र बौद्ध अवशेष (धार्मिक निशानियां) फिर से लद्दाख लाए गए हैं। पहले, यहां पहुंचना बहुत मुश्किल था क्योंकि सड़कें और सुविधाएं कम थीं, इसलिए बहुत कम लोग इन अवशेषों के दर्शन कर पाते थे।

अब बेहतर सड़क और कनेक्टिविटी के कारण ज्यादा लोग इन पवित्र अवशेषों को देख सकेंगे और उनसे आध्यात्मिक प्रेरणा ले पाएंगे। शाह ने कहा कि लद्दाख, कारगिल और अन्य क्षेत्रों के लोग चाहे वे किसी भी धर्म के हों इनसे शांति और दिव्यता का अनुभव करेंगे।

जानें बुद्ध पूर्णिमा के बारे में:

बुद्ध पूर्णिमा, गौतम बुद्ध के जन्म दिवस के रूप में मनाई जाती है। इसे वेसाक भी कहा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण (निधन) हुआ था। गौतम बुद्ध का जन्म एक राजघराने में हुआ था, लेकिन 29 साल की उम्र में उन्होंने संसार का त्याग कर सत्य की खोज शुरू की। बाद में वे “एशिया की रोशनी” के नाम से प्रसिद्ध हुए और उन्होंने पूरी दुनिया को शांति, अहिंसा और करुणा का संदेश दिया।

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