20 TMC MPs to support NDA: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। खबरों के अनुसार, टीएमसी के 20 सांसदों ने ओम बिरला को पत्र लिखकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस (एनडीए) को समर्थन देने की इच्छा जताई है।
टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने बताया कि उनके सहित 20 सांसदों ने एनडीए के साथ जाने का फैसला किया है। उनका कहना है कि वे पश्चिम बंगाल के हालिया चुनावी नतीजों को स्वीकार करते हैं और उन्हें लगता है कि उनका राजनीतिक भविष्य एनडीए के साथ अधिक सुरक्षित रहेगा।
बगावत की चर्चा पहले से थी
इससे पहले भी पार्टी में असंतोष की खबरें सामने आ चुकी थीं। बताया जाता है कि सुखेंदु रॉय और काकोली दस्तीदार के नेतृत्व में टीएमसी के कई सांसदों ने बंगाल के सीएम सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। इस बैठक के बाद पार्टी में टूट की अटकलें और तेज हो गई थीं।
दल-बदल कानून क्या कहता है?
संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत, यदि किसी पार्टी के कम से कम दो-तिहाई सांसद या विधायक एक साथ अलग होने का फैसला करते हैं, तो उन पर दल-बदल कानून लागू नहीं होता। लोकसभा में टीएमसी के मामले में यह संख्या लगभग 19 सांसदों की बनती है। ऐसे में यदि 20 सांसद अलग होते हैं, तो वे कानूनी रूप से अलग समूह बनाने का दावा कर सकते हैं।
लोकसभा स्पीकर से अलग बैठने की मांग
बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को एक और पत्र लिखकर सदन में अलग बैठने की व्यवस्था करने की मांग भी की है। जिन सांसदों के नाम सामने आए हैं, उनमें काकोली दस्तीदार, पार्थ भौमिक, जगदीश बसुनिया, देव, शताब्दी रॉय, रचना बनर्जी, कालिपदा सोरेन, अरूप चक्रवर्ती, असित मल, शत्रुघ्न सिन्हा, प्रसून बनर्जी, प्रतिमा मंडल और बापा हलदार सहित कई अन्य नेता शामिल बताए जा रहे हैं।
भूपेंद्र यादव से भी हुई मुलाकात
इसी बीच यह भी खबर सामने आई कि टीएमसी के कुछ असंतुष्ट सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से उनके आवास पर मुलाकात की। उस समय ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता विपक्षी गठबंधन इंडिया अलायंस की बैठक में शामिल थे। इस मुलाकात को टीएमसी के भीतर बढ़ते असंतोष और संभावित राजनीतिक बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
सुखेंदु रॉय ने लगाए गंभीर आरोप
इससे पहले सुखेंदु रॉय ने टीएमसी से इस्तीफा देते हुए आरोप लगाया था कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार में भ्रष्टाचार बढ़ा है और महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों को लेकर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे।

