Last Updated: September 20, 2026

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‘TMC में किसी की नहीं सुनी जाती’, जगदीश बसुनिया बोले- 20 सांसद PM मोदी के साथ जाने को तैयार

June 12, 2026

‘TMC में किसी की नहीं सुनी जाती’, जगदीश बसुनिया बोले- 20 सांसद PM मोदी के साथ जाने को तैयार

Jagadish Barma Basunia News: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के बागी सांसद जगदीश बर्मा बसुनिया ने शुक्रवार को पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि TMC में नेताओं और जनप्रतिनिधियों की बात सुनने की कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी से अलग हुए करीब 20 सांसद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन करने का फैसला कर चुके हैं।

बसुनिया उन सांसदों में शामिल हैं जिन्होंने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में TMC के खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी नेतृत्व से दूरी बना ली है। इन सांसदों ने पहले ही लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय में आवेदन देकर संसद में अलग बैठने की मांग की थी।

ममता बनर्जी किसी की राय नहीं सुनते

बसुनिया ने कहा कि पार्टी में लोकतांत्रिक माहौल खत्म हो चुका है। उनके अनुसार, ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी और अन्य शीर्ष नेता किसी की राय नहीं सुनते। उन्होंने कहा कि अभी 19 सांसद अलग हुए हैं, लेकिन आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के दौरान उम्मीदवारों के चयन में सांसदों, स्थानीय नेताओं और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से कोई सलाह नहीं ली गई। बसुनिया ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने राजनीतिक रणनीतिकार संस्था I-PAC के साथ मिलकर अपने स्तर पर उम्मीदवार तय किए, जिसका नुकसान चुनाव परिणामों में देखने को मिला।

पार्टी के भीतर अपनी बात रखने की आजादी नहीं

बागी सांसद ने कहा कि पार्टी के भीतर अपनी बात रखने की आजादी नहीं है। जो नेता नेतृत्व के फैसलों पर सवाल उठाते हैं, उन्हें किनारे कर दिया जाता है या उनके पद छीन लिए जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने 2019 से ही कई बैठकों में अपनी चिंताएं उठाईं, लेकिन उनकी बातों को नजरअंदाज कर दिया गया। बसुनिया ने कहा कि उनके लिए अपने क्षेत्र का विकास सबसे महत्वपूर्ण है। उनका मानना है कि विकास कार्यों के लिए केंद्र और राज्य सरकार दोनों का सहयोग जरूरी होता है। इसी कारण अलग हुए सांसदों ने केंद्र सरकार और NDA के साथ खड़े होने का फैसला किया है ताकि अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जा सके।

18 मई को कैसे बढ़ा विवाद?

उन्होंने TMC सांसद कल्याण बनर्जी की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब पार्टी के कई पुराने और वरिष्ठ नेताओं की भी बात नहीं सुनी जा रही है। यह विवाद 18 मई को तब और बढ़ गया था जब काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय समेत 19 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय में अपने नाम जमा कर संसद में अलग बैठने की मांग की थी। इस सूची में बापी हलधर, डॉ. शर्मिला सरकार, प्रसून बंद्योपाध्याय, जगदीश बर्मा बसुनिया, असित कुमार मल, अरूप चक्रवर्ती, रचना बनर्जी, सायोनी घोष, खलीलुर रहमान, अबू ताहिर खान, यूसुफ पठान, मिताली बाग, माला रॉय, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी, जून मालिया और पार्थ भौमिक सहित कई सांसद शामिल हैं।

इससे पहले काकोली घोष दस्तीदार भी पुष्टि कर चुकी हैं कि करीब 20 सांसदों के समूह ने लोकसभा में अलग बैठने की औपचारिक मांग की है। इसे TMC के भीतर बढ़ती नाराजगी और संगठनात्मक विभाजन का बड़ा संकेत माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी के कमजोर प्रदर्शन के बाद TMC के पुराने नेताओं और केंद्रीय नेतृत्व के बीच मतभेद बढ़े हैं। ऐसे में सांसदों का अलग समूह बनाना पार्टी के लिए एक नई चुनौती बन सकता है।

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