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‘यह मेरे लिए नहीं, लोकतंत्र और संविधान के लिए झटका’, नामांकन खारिज होने पर मीनाक्षी नटराजन का हमला

Meenakshi Natarajan on rejection of her nomination

Meenakshi Natarajan on rejection of her nomination

Meenakshi Natarajan on rejection of her nomination: मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी याचिका खारिज किए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह फैसला सिर्फ उनके व्यक्तिगत राजनीतिक भविष्य से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि देश के लोकतंत्र और संविधान के लिए एक बड़ा झटका है।

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका 

मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रिटर्निंग ऑफिसर ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि उन्होंने अपने खिलाफ लंबित एक आपराधिक मामले की जानकारी नामांकन पत्र में नहीं दी। इसके बाद उन्होंने इस फैसले को चुनौती देते हुए पहले चुनाव आयोग और फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई के बाद हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और याचिका खारिज कर दी। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके इस फैसले का असर भविष्य में इस मामले से जुड़ी किसी चुनाव याचिका पर नहीं पड़ेगा, जिसे संबंधित हाई कोर्ट में दायर किया जा सकता है।

फैसले के बाद क्या बोली मीनाक्षी नटराजन

फैसले के बाद मीडिया से बातचीत में मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि यह सिर्फ उनका निजी नुकसान नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने उनकी शिकायत पर समय रहते कोई जवाब नहीं दिया और पूरे मामले को सही ढंग से नहीं संभाला। उन्होंने कहा, “यह मेरे लिए व्यक्तिगत झटका नहीं है। यह लोकतंत्र और भारत के संविधान के लिए झटका है। हमने चुनाव आयोग से संपर्क किया, लेकिन 48 घंटे तक हमें कोई जवाब नहीं मिला। कम से कम सुप्रीम कोर्ट ने हमारी बात सुनी और इस पर फैसला दिया।”

कांग्रेस नेता ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि इस मामले में चुनाव आयोग और रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं और जनता के सामने पूरी प्रक्रिया उजागर हो गई है।बाद में ANI से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहतीं, लेकिन चुनाव आयोग के रवैये से सभी परिचित हैं।

क्या है पूरा मामला?

मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों में से एक सीट के लिए मीनाक्षी नटराजन ने कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया था। रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उन्होंने अपने खिलाफ लंबित आपराधिक मामले का पूरा विवरण नहीं दिया। इसके बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर नामांकन रद्द करने का फैसला वापस लेने की मांग की। जब आयोग से राहत नहीं मिली तो पार्टी सुप्रीम कोर्ट पहुंची।

सुनवाई के दौरान कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ अभी तक किसी मामले में आरोप तय (Charges Framed) नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधित्व कानून (Representation of the People Act) के तहत केवल लंबित मामले के आधार पर नामांकन रद्द नहीं किया जा सकता। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और याचिका खारिज कर दी।

कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस नेताओं ने नई दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और सत्याग्रह भी किया। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि नामांकन खारिज करने की प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं थी और इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। अब कांग्रेस के पास इस मामले में चुनाव याचिका के जरिए हाई कोर्ट जाने का विकल्प खुला हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना रह सकता है।

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