नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दोपहर 2 बजे संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर बोलेंगे। इस दौरान वे बताएंगे कि इस स्थिति का दुनिया और भारत पर क्या असर पड़ सकता है और भारत सरकार इसको लेकर क्या कदम उठा रही है।
इससे पहले प्रधानमंत्री कार्यालय में एक अहम बैठक हुई, जिसमें कैबिनेट सचिव ने दुनिया की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से जानकारी दी। बैठक में यह भी बताया गया कि अब तक सरकार ने क्या कदम उठाए हैं और आगे क्या योजनाएं बनाई जा रही हैं।
इस संघर्ष का असर कई क्षेत्रों पर पड़ सकता है, जैसे- कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, बिजली, छोटे उद्योग (MSME), निर्यात, शिपिंग और व्यापार। इन सभी सेक्टरों पर संभावित प्रभाव और उनसे निपटने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। सरकार ने खास तौर पर आम लोगों की ज़रूरी चीज़ों जैसे भोजन, ऊर्जा और ईंधन की उपलब्धता पर ध्यान दिया है। यह सुनिश्चित करने की योजना बनाई गई है कि इन चीज़ों की कमी न हो और लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
किसानों के लिए भी खास तैयारी की गई है। आने वाले खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की उपलब्धता का आकलन किया गया है। सरकार ने बताया कि पिछले कुछ सालों में पर्याप्त भंडार बनाया गया है, जिससे खाद की कमी नहीं होगी। साथ ही, भविष्य में सप्लाई बनाए रखने के लिए नए स्रोतों पर भी काम किया जा रहा है।
बिजली के क्षेत्र में भी तैयारी की गई है। सभी पावर प्लांट्स में पर्याप्त कोयले का स्टॉक बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बिजली की कमी न हो। इसके अलावा, दवाइयों, रसायनों और पेट्रोकेमिकल्स जैसे जरूरी उद्योगों के लिए आयात के अलग-अलग स्रोत खोजने पर भी जोर दिया गया है। निर्यात को बढ़ाने के लिए सरकार नए बाजारों की तलाश कर रही है, ताकि भारतीय उत्पादों को ज्यादा देशों तक पहुंचाया जा सके।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह एक बदलती हुई वैश्विक स्थिति है और इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। उन्होंने निर्देश दिया कि सरकार के सभी विभाग मिलकर काम करें, ताकि आम लोगों पर इसका असर कम से कम हो। इसके साथ ही, उन्होंने राज्य सरकारों को भी मिलकर काम करने को कहा, ताकि जरूरी चीज़ों की जमाखोरी और कालाबाज़ारी को रोका जा सके और लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।
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