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खड़गे ने राज्यसभा में अमित शाह से मांगा जवाब, रिजिजू बोले- मंत्री कौन आएगा, यह विपक्ष तय नहीं करेगा

Rijiju said opposition not decide who become minister

Rijiju said opposition not decide who become minister

नई दिल्ली: राज्यसभा में शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई के मामले में अमित शाह से सदन में आकर जवाब देने की मांग दोहराई। विपक्षी सांसदों की लगातार नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।

खड़गे और रिजिजू के बीच तीखी बहस

मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने गृह मंत्री अमित शाह से सदन में आकर बयान देने के लिए कहा था, लेकिन सरकार उनकी बात का पालन नहीं कर रही है। खड़गे ने आरोप लगाया कि इससे सदन और सभापति दोनों का सम्मान प्रभावित हो रहा है। हालांकि, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने खड़गे के इस दावे को पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने कहा कि सभापति की ओर से गृह मंत्री को सदन में आने के लिए कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है। रिजिजू ने कहा कि विपक्ष यह तय नहीं कर सकता कि सरकार की ओर से किस मंत्री को कब सदन में आना चाहिए।

रिजिजू ने कहा कि अमित शाह रोज सुबह से लेकर संसद की कार्यवाही समाप्त होने तक संसद परिसर में मौजूद रहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब सरकार की ओर से जवाब दिया जाता है, तब विपक्ष के सदस्य सदन में मौजूद नहीं रहते और केवल हंगामा करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा, “मैं रिकॉर्ड पर यह बात कह रहा हूं कि सभापति ने गृह मंत्री को सदन में बुलाने का कोई निर्देश नहीं दिया है। सदन में सरकार की ओर से संबंधित मंत्री जवाब देते हैं। विपक्ष यह तय नहीं करेगा कि कौन मंत्री कब सदन में आएगा।”

“अमित शाह जवाब दो”, विपक्षी सांसदों का प्रदर्शन 

इससे पहले शुक्रवार सुबह विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में भी प्रदर्शन किया। उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर में कथित दान राशि की चोरी और छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर अमित शाह से जवाब देने की मांग की। बारिश के बावजूद विपक्षी सांसद छाते और तख्तियां लेकर संसद के मकर द्वार के बाहर जुटे और “अमित शाह जवाब दो” जैसे नारे लगाए। गौरतलब है कि शुक्रवार को संसद के दोनों सदनों में निजी सदस्यों (प्राइवेट मेंबर्स) के विधायी कार्यों के लिए समय निर्धारित है, लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण कार्यवाही की शुरुआत से ही माहौल तनावपूर्ण बना रहा।

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