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‘प्रभु श्रीराम से द्रोह करने वालों को धरती पर जगह नहीं मिली’, योगी आदित्यनाथ की दो टूक

Ramkatha Festival Closing ceremony

Ramkatha Festival Closing ceremony

Ramkatha Festival Closing ceremony: मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने दो टूक कहा कि जिनके मन में भारत के प्रति आस्था, निष्ठा नहीं है और जो संस्कारों का सम्मान नहीं कर सकते, ऐसे लोगों के लिए भारत की धरती धर्मशाला नहीं हो सकती। प्रभु श्रीराम से द्रोह करने वालों को धरती पर जगह नहीं मिली।

सीएम योगी ने लव व लैंड जिहाद के प्रति आगाह करते हुए कहा कि इसके विरुद्ध समाज को एकजुटता के साथ खड़ा होना होगा। तोड़ने वाली ताकतें जाति, भाषा, और क्षेत्र के नाम पर विभाजित करने की चेष्टा करेंगी, लेकिन भारत की संत शक्ति समाज को एकजुट कर देश को आगे ले जाना चाहती है। व्यासपीठ द्वारा जिस मर्म को समझाने का प्रयास किया गया, हमें उसे आत्मसात करना होगा। कथा केवल सुनने की नहीं, बल्कि अंगीकार करने की महत्वपूर्ण कड़ी का हिस्सा है।

रामभक्तों को संबोधित करते हुए क्या बोले सीएम योगी?

मुख्यमंत्री योगी मंगलवार को राजधानी में 9 दिवसीय रामकथा महोत्सव के समापन समारोह में रामभक्तों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने रामकथा का श्रवण भी किया। कथा का वाचन तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य द्वारा किया गया। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि जो भी प्रभु के सान्निध्य में आया, वह दैवीय आपदा से मुक्त रहता है। उन्होंने कामना की कि हर श्रद्धालु का जीवन सुख व समृद्धि के साथ बढ़ता रहे।

उन्होंने कहा कि संतों ने श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन को जन्म-मरण का प्रश्न बनाया था। संत इसका श्रेय नहीं चाहते थे, वे सिर्फ इसलिए अभियान से जुड़े क्योंकि भारतीय परंपरा, विरासत में मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम सभी के आदर्श हैं और राम नाम में जीवन की हर समस्या का समाधान है। राजनीति व पूर्वाग्रह से ग्रसित कुछ चुनिंदा नामों को छोड़ दें तो हर भारतवासी, जिसके अंदर भारत का डीएनए है, उसने भगवान राम के आदर्शों को जीवन का हिस्सा बनाया है। मर्यादा पुरुषोत्तम का नाम उत्तर से दक्षिण व पूरब से पश्चिम तक हर भारतीय को जोड़ने का सामर्थ्य रखता है।

491 वर्ष तक श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन चलता रहा

सीएम योगी ने कहा कि 491 वर्ष तक श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन चलता रहा। 2019 में सर्वोच्च न्यायालय की फुल बेंच के न्यायमूर्तियों ने अपने फैसले में कहा कि जहां रामलला विराजमान हैं, वहीं रामजन्मभूमि है। इसे लेकर साक्ष्य-प्रमाण और विद्वानों के वक्तव्य भी दिए गए थे। सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायमूर्ति ने स्वामी रामभद्राचार्य जी के बारे में कहा कि जब मैंने उनके वक्तव्य को सुना तो लगा कि सनातन धर्मावलंबियों के साथ सैकड़ों वर्षों से अन्याय हो रहा था।

गोरक्षपीठाधीश्वर ने कहा कि संतों की साधना राष्ट्र कल्याण व लोकमंगल के लिए है। जगद्गुरु श्रीरामभद्राचार्य जी द्वारा स्थापित भारत का पहला दिव्यांग विश्वविद्यालय चित्रकूट में है और वह उसके कुलाधिपति हैं। इस उम्र में वह आराम कर सकते थे, लेकिन राष्ट्रमंगल की कामना के साथ प्रभु की कथा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं। देश-दुनिया में कोई भी भक्त बुलाता है तो प्रभु की कृपा को जन-जन तक पहुंचाते हैं। इसके पीछे उनका उद्देश्य है कि भगवान राम के विराट आदर्शों से भक्त थोड़ा भी अंश जीवन में अंगीकार कर लें तो उनका, समाज व देश का कल्याण हो सकता है।

रावण और उसके राक्षसों की आर्याव्रत में घुसपैठ थी

मुख्यमंत्री ने कहा कि रावण और उसके राक्षसों की आर्याव्रत में घुसपैठ थी। खर-दूषण के आतंक से दंडकारण्य त्रस्त था। ताड़का, मारीच व सुबाहु ने बस्तर के वनों, नगरों को उजाड़ दिया था। जब भी नकारात्मक ताकतें वर्चस्व में आएंगी तो तहस-नहस करेंगी। शिक्षण संस्थानों व शोध केंद्रों को वैसे ही बंजर करेंगी, जैसे खर-दूषण व ताड़का द्वारा किया जाता था।

उन्होंने कहा कि महर्षि विश्वामित्र प्रभु श्रीराम को अपनी कथा की रक्षा के बहाने ले गए और उनकी ताकत को देखना चाहा। उनका सबसे पहला मुकाबला ताड़का से हुआ। मारीच व सुबाहु का भी अंत हुआ। पहले मारीच ने रावण को समझाने का प्रयास किया था, लेकिन रावण ने उसे मारने की धमकी दी, तब मारीच ने कहा कि यदि मरना ही है तो रावण के हाथों नहीं, बल्कि प्रभु श्रीराम के हाथों मरूंगा ताकि उद्धार हो जाए। सीएम ने कटाक्ष किया कि मारीच रिश्ते में रावण का मामा लगता था। मामा व चाचा अनुचित व्यवस्था में पड़ते हैं तो कुसंग की तरफ ले जाते हैं, सन्मार्ग की तरफ नहीं। दुर्योधन के मामा शकुनि ने महाभारत करा दिया।

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