
नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को 7 दिन बाद जमानत मिल गई है। अदालत ने दिल्ली पुलिस की उस मांग को खारिज कर दिया, जिसमें दोनों की हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की अपील की गई थी। अदालत के आदेश के बाद अब दोनों के तिहाड़ जेल से रिहा होने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, उनकी रिहाई इस शर्त पर होगी कि किसी दूसरे मामले में उनकी हिरासत जरूरी न हो।
दोनों कार्यकर्ता पिछले 7 दिनों से न्यायिक हिरासत में थे। उनकी हिरासत की अवधि बुधवार को समाप्त हो रही थी, जिसके बाद उन्हें सुनवाई के लिए एसईएम कोर्ट में पेश किया गया। इसी दौरान पुलिस ने उनकी हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया। अदालत के आदेश के मुताबिक, दोनों की निजी मुचलके पर रिहाई की शर्त स्वीकार कर ली गई है। जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें जेल से रिहा किया जा सकता है।
न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका ने दिल्ली हाईकोर्ट का भी रुख किया था। बुधवार को उनकी याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इस दौरान हाईकोर्ट ने दोनों के अदालत आने के तरीके पर सवाल उठाए। अदालत ने पूछा कि जब उनका मामला पहले से मजिस्ट्रेट कोर्ट में लंबित है और कानून में अपील समेत दूसरे विकल्प मौजूद हैं, तो वे सीधे संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट क्यों पहुंचे?
हाईकोर्ट ने यह भी सवाल किया कि जब निचली अदालत में मामले की सुनवाई चल रही है, तो पहले वहीं उपलब्ध कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया। सुनवाई के दौरान बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन, जमानतदारों को स्वीकार या खारिज करने और मजिस्ट्रेट के अधिकारों से जुड़े कानूनी मुद्दों पर भी सवाल उठाए गए। सुनवाई के बाद दोनों कार्यकर्ताओं ने अपनी याचिकाएं वापस ले लीं।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दोनों कार्यकर्ताओं की उम्र भी पूछी। उनके वकील ने बताया कि सौरव दास 27 साल और आशुतोष रांका 31 साल के हैं। इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि दोनों Gen Z नहीं हैं। अदालत ने यह भी पूछा कि मिलेनियल्स किस उम्र के लोगों को कहा जाता है। सुनवाई के दौरान प्रदर्शन में बच्चों की भागीदारी का भी जिक्र हुआ। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि प्रदर्शन में शामिल लोग वही हैं, लेकिन अब मामले का मुद्दा बदल गया है। अदालत की इन टिप्पणियों के दौरान प्रदर्शन और उससे जुड़े घटनाक्रम पर भी चर्चा हुई।
आठ दिन की न्यायिक हिरासत के बाद जमानत मिलने से सौरव दास और आशुतोष रांका को राहत मिली है। दिल्ली पुलिस की हिरासत बढ़ाने की मांग खारिज होने और निजी मुचलके पर रिहाई की शर्त स्वीकार किए जाने के बाद उनकी रिहाई की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। हालांकि, दोनों की वास्तविक रिहाई जेल प्रशासन की औपचारिकताओं और किसी अन्य मामले में हिरासत की जरूरत नहीं होने पर निर्भर करेगी।