नई दिल्ली: लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल पास नहीं हो सका। इस पर विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष ने “संविधान पर हमले को हरा दिया है।” राहुल गांधी का कहना है कि यह बिल असल में महिलाओं को आरक्षण देने के लिए नहीं था, बल्कि इसके जरिए देश के राजनीतिक ढांचे को बदलने की कोशिश की जा रही थी। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने साफ कर दिया था कि यह सही महिला आरक्षण बिल नहीं है, इसलिए इसका विरोध किया गया।
‘बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 विरोध में’
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि अगर सरकार सच में महिला आरक्षण लागू करना चाहती है, तो 2023 वाला सही बिल लाए और उसे तुरंत लागू करे। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि ऐसे किसी सही बिल को विपक्ष पूरा समर्थन देगा। यह बिल 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण लागू करने के लिए लाया गया था। लेकिन जब इस पर वोटिंग हुई, तो यह पास नहीं हो पाया। बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसके खिलाफ वोट दिया।
संविधान संशोधन बिल पास होने के लिए जरूरी होता है कि सदन में मौजूद और वोट करने वाले सांसदों में से कम से कम दो-तिहाई उसका समर्थन करें। इस बिल को उतना समर्थन नहीं मिला, इसलिए यह गिर गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने परिणाम घोषित करते हुए कहा कि बिल को जरूरी बहुमत नहीं मिला, इसलिए इसे पास नहीं माना जाएगा।
यह बिल जानबूझकर लाया गया: कांग्रेस सांसद रवि
कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने आरोप लगाया कि सरकार को पहले से पता था कि उसके पास पर्याप्त बहुमत नहीं है, फिर भी यह बिल जानबूझकर लाया गया। उन्होंने डिलिमिटेशन (सीमांकन) को लेकर भी शक जताया और कहा कि इसी वजह से विपक्ष ने इसका विरोध किया। वहीं, कांग्रेस सांसद धर्मवीर गांधी ने कहा कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर डिलिमिटेशन का एजेंडा आगे बढ़ाना चाहती थी।
बाकी दो बिलों को आगे नहीं बढ़ाएगी सरकार: किरेन रिजिजू
बिल पास न होने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार अब इस से जुड़े बाकी दो बिलों को आगे नहीं बढ़ाएगी। कुल मिलाकर, महिला आरक्षण पर राजनीति तेज हो गई है, और अब देखना होगा कि सरकार आगे क्या कदम उठाती है।

