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‘स्वराज का मतलब खुद पर शासन करना’, RSS-BJP पर राहुल गांधी का निशाना

Rahul Gandhi launches scathing attack on TMC name-symbol freeze

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नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि RSS यह मानकर चल रहा है कि वह देश के करीब 1.5 अरब लोगों की सच्चाई और उनके लिए सही रास्ता जानता है। राहुल गांधी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति या संगठन को दूसरे लोगों पर अपनी सोच या विचारधारा थोपने का अधिकार नहीं है।

राहुल गांधी राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ‘हरा भरा स्वराज: राजीव गांधी के विजन को श्रद्धांजलि’ कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने महात्मा गांधी के ‘स्वराज’ के विचार और मौजूदा राजनीतिक माहौल पर अपने विचार रखे।

‘हर व्यक्ति को अपना सच खोजने का अधिकार’

राहुल गांधी ने कहा कि महात्मा गांधी का मानना था कि हर व्यक्ति एक अलग इंसान है और उसके पास सच्चाई तक पहुंचने का अपना रास्ता है। किसी दूसरे व्यक्ति के अनुभवों को जाने बिना यह दावा नहीं किया जा सकता कि उसके लिए क्या सही है। उन्होंने कहा, “मैं यह नहीं बता सकता कि आपका सच क्या है।” राहुल ने इसी संदर्भ में RSS पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी सबसे बड़ी समस्या यह है कि संगठन ने यह मान लिया है कि वह देश के 1.5 अरब लोगों का सच जानता है।

उन्होंने कहा कि वास्तव में हर व्यक्ति ही अपने अनुभवों और जीवन के आधार पर अपने सच को समझ सकता है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि वह खुद भी किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन का सच तय नहीं कर सकते, क्योंकि उन्होंने उस व्यक्ति जैसी परिस्थितियों का सामना नहीं किया है।

गांधी के ‘माई एक्सपेरिमेंट्स विद ट्रुथ’ का दिया उदाहरण

राहुल गांधी ने महात्मा गांधी की आत्मकथा ‘द स्टोरी ऑफ माई एक्सपेरिमेंट्स विद ट्रुथ’ का उदाहरण देते हुए कहा कि गांधी ने भी अपनी किताब का नाम ‘द ट्रुथ’ यानी ‘सच्चाई’ नहीं रखा था। उन्होंने कहा कि गांधी के लिए सत्य तक पहुंचना एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया थी। हर व्यक्ति अपने जीवन में अपने अनुभवों के आधार पर सत्य को समझने की कोशिश करता है। राहुल ने कहा कि यही विचार भारतीय समाज में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जिम्मेदारी को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

BJP और RSS पर समाज को बांटने का आरोप

राहुल गांधी ने BJP और RSS पर अलग-अलग समुदायों के बीच डर और अलगाव की भावना पैदा करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि देश के हर नागरिक को यह महसूस होना चाहिए कि वह भारत का हिस्सा है और उसे समान सम्मान और अधिकार प्राप्त हैं। उन्होंने मुस्लिम, ईसाई और सिख समुदायों के साथ-साथ आदिवासियों और दलितों का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी भी समुदाय को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि उसके अधिकार या अस्तित्व को खतरा है।

राहुल गांधी ने कहा कि भारत में हर व्यक्ति को अपने धर्म, समुदाय या जेंडर से अलग एक समान नागरिक के रूप में सम्मान मिलना चाहिए। उनके मुताबिक, हर व्यक्ति को देश में स्वतंत्र रूप से रहने, घूमने और अपनी बात रखने का अधिकार होना चाहिए।

‘स्वराज’ का मतलब सिर्फ आजादी नहीं’

राहुल गांधी ने अपने भाषण में ‘स्वराज’ और पश्चिमी अर्थों में ‘आजादी’ के बीच अंतर भी समझाया। उन्होंने कहा कि स्वराज का अर्थ केवल बाहरी स्वतंत्रता नहीं, बल्कि ‘खुद पर शासन’ करना है। उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का उदाहरण देते हुए कहा कि पश्चिमी अर्थों में किसी व्यक्ति को आजाद माना जा सकता है, लेकिन गांधी के विचार में असली सवाल यह है कि क्या वह व्यक्ति खुद पर नियंत्रण रखता है। राहुल गांधी ने महात्मा गांधी के जेल में रहने के दौरान स्वराज से जुड़े विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि कोई व्यक्ति जेल में होते हुए भी खुद पर शासन कर सकता है। उनके अनुसार, यही स्वराज की मूल भावना है।

‘स्वराज कोई दूसरा व्यक्ति आपको नहीं दे सकता’

राहुल गांधी ने कहा कि स्वराज एक व्यक्तिगत यात्रा है। कोई नेता या सरकार किसी दूसरे व्यक्ति को स्वराज नहीं दे सकती, क्योंकि यह व्यक्ति के अपने जीवन, सोच और दुनिया के साथ उसके संबंध से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का सपना था कि देश का हर व्यक्ति अपने जीवन में स्वराज के रास्ते पर आगे बढ़े। राहुल के मुताबिक, लोकतंत्र में लोगों को अपनी सोच बनाने, अपने अनुभवों से सीखने और अपने जीवन का रास्ता खुद तय करने का अधिकार मिलना चाहिए।

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