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केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chauhan ने दरभंगा में मखाना के किसानों से की चर्चा

February 23, 2025

केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chauhan ने दरभंगा में मखाना के किसानों से की चर्चा

दरभंगा : केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chauhan आज बिहार पहुंचे, जहां उन्होंने दरभंगा में तालाब में उतरकर मखाना उत्पादक किसानों से सीधी चर्चा की। उन्होंने मखाने की खेती की पूरी प्रक्रिया समझी और मखाना उत्पादन में आने वाली कठिनाइयों को जानने के साथ ही किसानों से सुझाव भी लिए। शिवराज सिंह ने कहा कि मखाना की खेती कठिन है और तालाब में दिनभर रहकर खेती करनी होती है। केंद्र सरकार ने इस वर्ष बजट में मखाना बोर्ड के गठन की घोषणा की है और इस बोर्ड के गठन के पहले वे किसानों से सुझाव लेकर चर्चा कर रहे है, ताकि किसानों की वास्तविक समस्याएं समझी जा सकें। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने दरभंगा में राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र पर संवाद कार्यक्रम में मखाना के किसानों से सुझाव लेने के साथ ही उन्हें संबोधित भी किया। इस अवसर पर बिहार के उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित अन्य मंत्री, सांसद और विधायक भी उपस्थित थे।

इस दौरान कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हम केवल विभाग नहीं चलाते हैं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में गहराई तक जाकर, कैसे हम किसानों की तकलीफ दूर करें, इसकी कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि किसान की आमदनी बढ़े, 57% लोग आज भी खेती पर निर्भर हैं और खेती भी एक चीज की नहीं है, कहीं केला है तो कहीं लीची है, कहीं मकई है तो कहीं गेहूं है कहीं धान है, इस धरती पर तो मखाना है। अगर किसानों का कल्याण करना है तो हमें हर एक फसल को ठीक से देखना पड़ेगा और इसलिए जब मैं पहली बार कृषि मंत्री बनकर पटना आया था, कृषि भवन में तब बैठक हुई थी, किसानों के साथ और उस बैठक में मखाना उत्पादक किसानों ने अपनी समस्या बताई थी। शिवराज सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेई जी को याद करते हुए प्रणाम किया, जिन्होंने ये केंद्र बनाया था और शिवराज सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी जी का भी अभिनंदन किया कि अब उन्होंने मखाना बोर्ड बनाने का फैसला किया है।

मखाना आसानी से पैदा नहीं होता है

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि मखाना सुपरफूड है, पौष्टिकता का भंडार है, ये मखाना आसानी से पैदा नहीं होता है। मखाना पैदा करने के लिए कितनी तकलीफें सहनी पड़ती है, ये यहां आकर देखा जा सकता है। इसलिए मेरे मन में ये भाव आया कि जिन्होंने किसानों की तकलीफ नहीं देखी, वो दिल्ली के कृषि भवन में बैठकर मखाना बोर्ड बना सकते हैं क्या..? इसीलिए मैंने कहा, पहले वहां चलना पड़ेगा जहां किसान मखाने की खेती कर रहा है। खेती करते करते कितनी दिक्कत और परेशानी आती है, ये भी हो सकता है कि यहां कार्यक्रम करते और निकल जाते लेकिन इससे भी सही जानकारी नहीं मिलती।

केंद्रीय कृषि मंत्री बोले, मन में भाव आया कि शिवराज तू तो सेवक है, एक बार पोखर, तालाब में उतर जा, और मखाने की बेल को लगा, तब तो पता चलेगा कि मखाने की खेती कैसे होती है। जब बेल हाथ में ली तो पता चला कि उसके ऊपर भी कांटे और नीचे भी कांटे थे। हम तो केवल मखाने खाते हैं, लेकिन कभी कांटे नहीं देखे। जब हमारे किसान भाई-बहन मखाने की खेती करते हैं उनके लिए जितना लगाना कठिन है, उतना ही निकालना भी कठिन है।

पानी में डुबकी लगाकर निकालना पड़ता है

शिवराज सिंह ने किसानों से कहा कि सही अर्थों में आपसे समझकर कि मखाना बोर्ड बने तो कैसे बने, इसलिए मेरा अधिकारियों को भी निर्देश है ICAR के लोग, अनुसंधान केंद्र के लोग इस पर काम करे कि कांटा रहित मखाने का बीज कैसे विकसित किया जा सकता है। ये असंभव नहीं है, यहाँ बात मैकेनाइजेशन की आई, पानी में डुबकी लगाकर निकालना पड़ता है पूरे डूब गये आँख, नाक, कान में पानी और केवल पानी ही नहीं होता है, पानी के साथ कीचड़ भी होता है। अब आज के योग में मैकेनाइजेशन से ये चीज बदली जा सकती है, अभी यंत्र तो बने हैं लेकिन उसमें आधा मखाना आता है और आधा आता ही नहीं है। गुरिया बड़ी मुश्किल से निकलती है और इसलिए मैकेनाइजेशन होगा और ऐसे यंत्र बनाए जाएंगे जो गुरिया को आसानी से बाहर खींच लाए। आज टेक्नोलॉजी है और प्रोसेसिंग में लगे कई मित्र ये काम कर रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि हम एक तो करेंगे कि उत्पादन कैसे बढ़े। दूसरा हम काम करेंगे उत्पादन की लागत घटाना: लागत कैसे घट सकती है उसके कई पक्ष मेरे सामने आ गये हैं। तीसरा काम- उत्पादन में आने वाली कठिनाइयों को दूर करना, जिससे खेती आसान हो जाए। अब कई पोखर चाहिए, तालाब चाहिए पानी रोकने की व्यवस्था चाहिए, हम लोग विचार करेंगे कि केंद्र और राज्य सरकार की अलग-अलग योजना के तहत ये कैसे बनाए जा सकते हैं। क्या मनरेगा में कहीं तालाबों का निर्माण हो सकता है। कई तरह के रास्ते निकल सकते हैं, उस पर भी हम काम करेंगे। कठिनाइयों को दूर करना और एक जिसके लिए कई काम करने पड़ेंगे वो है-उचित मूल्य मखाने का मिल जाए, इसका इंतजाम करना। अभी तो ठीक है लेकिन कई बार दाम गिर जाते हैं और इसलिए बाजार का विस्तार मंडियों को ठीक करना, घरेलू बाजार, अंतर्राष्ट्रीय बाजार। उन्होंने कहा कि ये सुपरफूड़ मखाना एक दिन दुनिया में छा जाएगा, क्योंकि इसके गुणधर्म ऐसे हैं। जानकी मैया का आशीर्वाद प्राप्त है और इसलिए सुपरफूड की कैसे हम मार्केटिंग करें, ब्रांडिंग करें, पेकेजिंग करें, उस सभी में सहयोग देंगे।

उन्होंने कहा कि लीज पर ज़मीन लेकर खेती करने वाले किसानों को केंद्र सरकार की सभी योजनाओं का लाभ मिले। चाहे किसान क्रेडिट कार्ड हो, कम दरों पर ब्याज, खाद की व्यवस्था, एमएसपी आदि। जो बटाईदार है जो मेहनत कर रहा है उसको भी लाभ मिलना चाहिए। इस दिशा में हम काम कर रहे हैं। मखाना उत्पादन किसानों की ट्रेनिंग पर भी काम किया जाएगा। कार्यशाला लगाना, ट्रेनिंग कैंप लगाकर कैसे कौशल विकसित किया जाए, इसकी कोशिश करेंगे। शिवराज सिंह ने कहा कि आज का कार्यक्रम कर्मकांड नहीं है, बल्कि एनडीए और भाजपा सरकार द्वारा आपकी ज़िन्दगी बदलने का प्रयास है। ये आम सभा नहीं है, ये किसान पंचायत है। मैं मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री रहते हुए भी किसानों से बात करके उनके कल्याण की योजना बनाता था। यही तो जनता का, जनता के लिए, जनता द्वारा शासन है।

प्रधानमंत्री मोदी के आतिथ्य में 24 फरवरी को किसान सम्मान समारोह

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि कल बिहार के सौभाग्य के सूर्य का उदय होगा, जब प्रधानमंत्री जी यहाँ पधारेंगे। पत्रकारों से बातचीत में शिवराज सिंह ने कहा कि बिहार अद्भुत राज्य है, यहां का टैलेंट, यहां के मेहनती किसान और विशेषकर बिहार का मखाना सुपर फूड है। मखाना का उत्पादन बढ़े, प्रोसेसिंग हो गुणवत्ता बढ़े, अभी मखाना उत्पादक किसान कई कठिनाइयों में काम करते हैं, टेक्नोलॉजी के माध्यम से उन कठिनाइयों को दूर किया जाए, इसके लिए मखाना बोर्ड का गठन किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री जी के आगमन के कार्यक्रम की तैयारियां भी देखूंगा, क्योंकि कार्यक्रम केवल बिहार में नहीं है, कार्यक्रम देशभर के किसानों के लिए है। बिहार के साथ और सभी जिलों में, ब्लॉक मुख्यालयों पर, पंचायतों में और विशेषकर कृषि विज्ञान केंद्रों में किसान प्रधानमंत्री जी को सुनने इकट्ठा होंगे। केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री जी देश के 9 करोड़ 80 लाख किसानों के खाते में 22 हजार करोड रुपए से ज्यादा की किसान सम्मान निधि की राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से डालेंगे। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि छोटे किसानों के लिए वरदान है और पूरे देश में प्रधानमंत्री जी बिहार के दरभंगा से किसानों के खाते में ये राशि डालने वाले हैं।

एक प्रश्न के उत्तर में शिवराज सिंह ने कहा कि तेजस्वी यादव ये जान ले कि प्रधानमंत्री जी अभी उतर रहे हैं मध्यप्रदेश, वहां कोई चुनाव नहीं है। वो ये भी जान ले कि यहां के बाद जाएंगे प्रधानमंत्री जी असम, वहां कोई चुनाव नहीं है, इसके पहले के प्रधानमंत्री के दौरे देख लो, हमारे प्रधानमंत्री हमेशा जनता के बीच रहते है , जाते हैं।

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