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Parliament : लोकसभा में गिरा महिला आरक्षण बिल, विरोध में पड़े 230 वोट

Women's reservation bill defeated in Lok Sabha, 230 votes against

Women's reservation bill defeated in Lok Sabha, 230 votes against

नई दिल्ली: महिला आरक्षण बिल लोकसभा में पारित नहीं हो पाया है। इस बिल को पास कराने के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि बिल के विरोध में 230 वोट पड़े हैं। कुल 528 सदस्यों ने मतदान किया। यह बिल दो तिहाई बहुमत से पारित नहीं हुआ। इसके बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने लोकसभा को कल सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दिया है। वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अन्य दो बिल आगे नहीं बढ़ाने का ऐलान किया है।

पहले के अपडेट के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े तीन महत्वपूर्ण बिलों पर चर्चा के दौरान विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि INDI Alliance के सभी दलों ने सीधे विरोध नहीं किया, लेकिन “अगर-मगर” (शर्तों और बहानों) के जरिए इन बिलों का विरोध किया।

क्या है पूरा मामला?

सरकार तीन बड़े बिल लेकर आई है संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026, यूनियन टेरिटरी लॉज़ (संशोधन) बिल, 2026 और डिलिमिटेशन (सीमांकन) बिल, 2026. इनका मुख्य उद्देश्य महिला आरक्षण कानून को 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करना है।

 

अमित शाह ने क्या कहा?

अमित शाह ने कहा कि किसी ने महिला आरक्षण का खुलकर विरोध नहीं किया, लेकिन विपक्षी दलों ने “अगर-मगर” के जरिए इसे कमजोर करने की कोशिश की। जो लोग डिलिमिटेशन का विरोध कर रहे हैं, वे असल में SC/ST सीटों की बढ़ोतरी का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार चाहती है कि “एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य” का सिद्धांत पूरी तरह लागू हो।

डिलिमिटेशन को लेकर क्या विवाद है?

डिलिमिटेशन का मतलब है, लोकसभा सीटों की संख्या और सीमाओं को दोबारा तय करना। विपक्ष को डर है कि इससे दक्षिण भारत के राज्यों की ताकत कम हो सकती है। इस पर अमित शाह ने आंकड़ों के साथ जवाब दिया: दक्षिण भारत की सीटें घटेंगी नहीं, बल्कि बढ़ेंगी उदाहरण के तौर पर कर्नाटक में 28 से बढ़कर 42 सीटें, आंध्र प्रदेश में 25 से बढ़कर 38 सीटें, तमिलनाडु में 39 से बढ़कर 59 सीटें, तेलंगाना में17 से बढ़कर 26 सीटें और केरल में 20 से बढ़कर 30 सीटें। उन्होंने कहा कि इन राज्यों का कुल प्रतिशत भी थोड़ा बढ़ेगा, इसलिए नुकसान की बात गलत है।

 

प्रधानमंत्री का पक्ष

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पहले इस मुद्दे पर सफाई दी थी। उन्होंने कहा, ”देश के किसी भी हिस्से (उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम) के साथ अन्याय नहीं होगा। सीटों में बढ़ोतरी उसी अनुपात में होगी। अगर जरूरत पड़ी तो सरकार इस पर गारंटी देने को भी तैयार है।”

इन बिलों पर संसद में चर्चा जारी है। अगर ये पास हो जाते हैं, तो 2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण लागू हो सकता है। लोकसभा सीटों की संख्या भी बढ़ सकती है। चुनावी क्षेत्रों का नया सीमांकन किया जाएगा। यह मुद्दा आने वाले समय में राजनीति का बड़ा केंद्र बना रह सकता है।

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