Last Updated: November 7, 2026

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राष्ट्रीय लोक अदालत में 12,701 मामलों का मौके पर निपटारा

September 12, 2026

राष्ट्रीय लोक अदालत में 12,701 मामलों का मौके पर निपटारा

12,701 cases settled in the National Lok Adalat : अमृतसर। तरनतारन सेशंस डिवीजन में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में 13,911 सूचीबद्ध मामलों में से 12,701 मामलों का आपसी सहमति से मौके पर ही निपटारा किया गया। इन मामलों में कुल 21.90 करोड़ रुपये का समझौता हुआ। लोक अदालत के दौरान अलग हो चुके कुछ विवाहित जोड़े फिर से एक हुए और लंबे समय से चले आ रहे विवाद भी सुलझाए गए। वहीं, बीमा संबंधी मामलों में 1.58 करोड़ रुपये से अधिक के चेक भी मौके पर संबंधित पक्षों को सौंपे गए।

तरनतारन के ज़िला और सेशंस जज और ज़िला लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी के चेयरमैन, कंवलजीत सिंह बाजवा ने बताया कि जनता की सुविधा के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल आठ बेंच बनाई गई थीं। इन बेंचों की अध्यक्षता निम्नलिखित लोगों ने की: पहली बेंच की अध्यक्षता मनोज कुमार, एडिशनल ज़िला और सेशंस जज (प्रिंसिपल जज, फैमिली कोर्ट), तरनतारन ने की; दूसरी की अध्यक्षता सुश्री पूजा अंदोत्रा, एडिशनल ज़िला और सेशंस जज, तरनतारन ने की; तीसरी की अध्यक्षता दिलीप कुमार, एडिशनल सिविल जज (सीनियर डिवीज़न), तरनतारन ने की; चौथी की अध्यक्षता सुश्री मनजोत कौर, सिविल जज (जूनियर डिवीज़न), तरनतारन ने की; और पांचवीं की अध्यक्षता अजाब सिंह, चेयरमैन, परमानेंट लोक अदालत, तरनतारन ने की। इसके अलावा, पट्टी में दो बेंच लगाई गईं।

इनकी अध्यक्षता सिमरनजीत सिंह, सिविल जज (जूनियर डिवीज़न), पट्टी और माणिक कोरा, सिविल जज (जूनियर डिवीज़न), पट्टी ने की। साथ ही, खडूर साहिब में सुश्री मोनिका चौहान, सब-डिविज़नल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने एक बेंच की अध्यक्षता की। इस कार्यक्रम के दौरान, लोक अदालत बेंचों के पीठासीन अधिकारियों ने—ज़िला लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी के चेयरमैन के मार्गदर्शन में—जनता के साथ बहुत सहजता और संवेदनशीलता से बातचीत की। उन्होंने लोगों के विवादों और मुद्दों को आमने-सामने सुना, झगड़ों को सुलझाने के फायदे समझाए और उन्हें आपसी सहमति से अपने मामलों को निपटाने के लिए प्रोत्साहित किया।

संबंधित पक्षों की सहमति से, पीठासीन अधिकारियों ने इस राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए सूचीबद्ध 13,911 मामलों में से 12,701 मामलों का निपटारा किया, जिसमें कुल ₹21,90,42,890 का समझौता हुआ। इसके अलावा, बीमा से जुड़े मामलों में अंतिम फैसले के तौर पर ₹1,58,37,073 के चेक मौके पर ही संबंधित पक्षों को सौंपे गए। यह भी बताया गया कि इस प्रक्रिया के दौरान अलग हो चुके विवाहित जोड़े फिर से एक हो गए और लंबे समय से चले आ रहे विवाद सुलझा लिए गए। उन्होंने यह भी बताया कि अगर लोक अदालत में कोई मामला सुलझ जाता है, तो उस मामले के लिए दी गई कोर्ट फीस वापस कर दी जाती है।

अदालतों में समय-समय पर ‘प्री-लोक अदालतें’ भी आयोजित की जाती हैं। नेशनल लोक अदालत में शामिल पक्षों की आपसी सहमति से विवाद सुलझाए जाते हैं। कंवरजीत सिंह बाजवा ने आगे बताया कि नेशनल लोक अदालत के ज़रिए मामले सुलझाने के कई बड़े फ़ायदे हैं; इस तरह सुलझाए गए मामलों के ख़िलाफ़ किसी दूसरी अदालत में अपील नहीं की जा सकती, फ़ैसला अंतिम होता है, और आपसी सहमति से सुलझाए गए मामलों की कोर्ट फीस वापस मिल जाती है।

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