Site icon Dainik Savera Times

20 साल से कच्ची नौकरी, अब सरकार के खिलाफ मोर्चा

20 years of temporary employment, now a front : अमृतसर। वर्ष 2006 से ग्रामीण डिस्पेंसरी में कार्यरत फार्मेसी अधिकारियों और ग्रेड-4 कर्मचारियों ने नियमितीकरण की मांग पूरी न होने पर पंजाब सरकार के खिलाफ संघर्ष तेज करने का ऐलान किया है। संगठन के राज्य अध्यक्ष कमलजीत सिंह चौहान ने कहा कि सरकार के वादे पूरे नहीं हुए, इसलिए कर्मचारी 27 अगस्त की आम हड़ताल में शामिल होकर सामूहिक छुट्टी पर रहेंगे और मंत्रियों का घेराव कर विरोध दर्ज कराएंगे।

मान सरकार के दौरान इन सभी कर्मचारियों का डेटा हेड ऑफ़िस मंगाया गया था, जिससे कर्मचारियों को उम्मीद थी कि सरकार नए बनने वाले एक्ट में उन्हें पक्का कर देगी, लेकिन विधानसभा सत्र के आखिरी दिन एक्ट पास न करके सरकार ने एक बार फिर इन कर्मचारियों के साथ धोखा किया, जिससे सरकार के प्रति कर्मचारियों में बहुत ज़्यादा गुस्सा है। अब ये कर्मचारी हर तरह से सरकार का विरोध करने को तैयार हैं। संगठन के राज्य अध्यक्ष कमलजीत सिंह चौहान ने कहा कि सरकार हर बार की तरह इस बार भी बहाने बनाती दिख रही है क्योंकि सरकार ने विधानसभा सत्र में बिल पास करके हमें पक्का करने का वादा किया था, जो पूरा नहीं हो सका। अब सरकार से हमारी उम्मीदें बहुत कम हो गई हैं, इसलिए अब सरकार का पुरज़ोर विरोध करने का फ़ैसला किया गया है। सभी मंत्री जहाँ भी जाएँगे, यूनियन नेता उन्हें घेरेंगे और वादा तोड़ने का जवाब माँगेंगे। इसी सिलसिले में, ये कर्मचारी 27 अगस्त को ‘जॉइंट एम्प्लॉईज़ फ़्रंट पंजाब’ द्वारा बुलाई गई आम हड़ताल में भी शामिल होंगे और सामूहिक छुट्टी लेकर सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन करेंगे। इस मौके पर राज्य महासचिव स्वार्ता शर्मा, कोषाध्यक्ष गुरविंदर सिंह नीर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरिंदर सिंह धुंडा, संदीप कौर जालंधर, रीना राय मोहाली, दीपक शर्मा होशियारपुर, मनीष शर्मा और ग्रामीण डिस्पेंसरी में 20 साल से काम कर रहे ग्रामीण फार्मेसी अधिकारी और ग्रेड IV कर्मचारी भी 27 तारीख को होने वाली आम हड़ताल में शामिल होंगे।

ग्रामीण स्वास्थ्य फार्मेसी अधिकारी और ग्रेड IV कर्मचारी, जो 2006 से गांवों की डिस्पेंसरी में बहुत कम वेतन पर 20 साल से काम कर रहे हैं। सरकार बनने से पहले, माननीय मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान जी ने इन कर्मचारियों से अपनी ‘ग्रीन पेन’ से उन्हें पक्का करने का वादा करके वोट लिए थे, लेकिन सरकार बनने के बाद इन कर्मचारियों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। यहां तक ​​कि ‘समान काम, समान वेतन’ के लिए हाई कोर्ट के आदेशों को भी इन कर्मचारियों पर लागू नहीं किया गया। इस वजह से इन कर्मचारियों को हर महीने 25 हजार रुपये से ज्यादा का नुकसान हो रहा है। जुलाई 2026 में, मान सरकार ने इन सभी कर्मचारियों का डेटा हेड ऑफिस में मंगवाया था, जिस पर कर्मचारियों को उम्मीद थी कि सरकार नए बनने वाले कानून में उन्हें पक्का कर देगी, लेकिन विधानसभा सत्र के आखिरी दिन कानून पास न करके सरकार ने एक बार फिर इन कर्मचारियों के साथ धोखा किया, जिससे सरकार के प्रति कर्मचारियों में बहुत गुस्सा है। अब ये कर्मचारी हर तरह से सरकार का विरोध करने को तैयार हैं।

Exit mobile version