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सिविल अस्पताल का फायर सेफ्टी सिस्टम बंद, सुरक्षा पर सवाल

3 Fire Pumps Found Non-Operational : मोगा। सरकारी सिविल अस्पताल में मरीजों और स्टाफ की सुरक्षा को लेकर फायर सेफ्टी व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं। फायर विभाग की जांच में तीनों पंप बंद मिले, जबकि कई फायर बॉक्सों में कूड़ा और पोछे पड़े थे तथा कई जगह पाइप व नोजल भी उपलब्ध नहीं थे। अस्पताल प्रबंधन ने सिस्टम को जल्द चालू करवाने के प्रयासों की बात कही है।

 
फायर विभाग की ओर से किए गए निरीक्षण के दौरान सिस्टम से जुड़ी कई कमियां सामने आने की बात कही गई है। अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग से लेकर इमरजेंसी की तीसरी मंजिल तक जांच के दौरान कहीं फायर बॉक्सों में कूड़ा और पोछे पड़े मिले तो कई जगह पाइप और नोजल भी उपलब्ध नहीं थे। फायर विभाग के अनुसार अस्पताल में आगजनी की स्थिति से निपटने के लिए लगाए गए तीनों पंप चालू हालत में नहीं हैं।
 
इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर लगाए गए हाइड्रेंट प्वाइंट और होजरील की व्यवस्था भी पूरी तरह दुरुस्त नहीं पाई गई। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि अस्पताल में अचानक आग लगने जैसी आपात स्थिति पैदा होती है तो फायर सेफ्टी सिस्टम कितनी प्रभावी तरीके से काम कर पाएगा। फायर सेफ्टी व्यवस्था के तहत अस्पताल की विभिन्न मंजिलों पर पाइप, हाइड्रेंट, स्प्रिंकलर और स्मोक डिटेक्टर आदि लगाए जाते हैं। आग या धुएं की स्थिति में ये उपकरण समय रहते अलर्ट करने तथा आग पर काबू पाने में मदद करते हैं।
 
अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज, उनके परिजन और स्टाफ मौजूद रहते हैं, जबकि जच्चा-बच्चा वार्ड जैसे संवेदनशील हिस्सों में आग से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम बेहद जरूरी हैं। दो बार जांच के लिए भेजा गया पत्र जानकारी देते हुए फायर ऑफिसर अरविंदर सिंह ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन की ओर से फायर विभाग को दो बार जांच के लिए पत्र भेजे गए थे। दोनों बार विभागीय टीम ने मौके पर पहुंचकर फायर सेफ्टी इंतजामों का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि अस्पताल में तीन पंप लगे हुए हैं, लेकिन वे चालू हालत में नहीं हैं।
 
जहां हाइड्रेंट प्वाइंट और होजरील लगाए गए हैं, वहां भी कई फायर बॉक्सों का उचित रखरखाव नहीं हो रहा। कुछ बॉक्सों में कूड़ा और अन्य सामान पड़ा मिला। उन्होंने कहा कि यदि फायर सेफ्टी सिस्टम के जरूरी पाइप, नोजल और अन्य उपकरण मौजूद नहीं हैं तो सिस्टम को पूरी तरह तैयार नहीं माना जा सकता। खासकर जच्चा-बच्चा वार्ड जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में आग से बचाव के सभी आवश्यक प्रबंध होना जरूरी है। फायर विभाग की ओर से अस्पताल प्रबंधन को कमियां दूर कर दोबारा जांच के लिए आवेदन करने संबंधी निर्देश दिए जाने की बात भी कही गई है।
 
दो दिन पहले संभाला एसएमओ का चार्ज वहीं सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ. कुलदीप बिलोनिया ने बताया कि उन्होंने एसएमओ का चार्ज अभी दो दिन पहले ही संभाला है। उन्होंने उच्च अधिकारियों से जानकारी लेने के बाद बताया कि अस्पताल में फायर सेफ्टी सिस्टम लगा हुआ है, लेकिन फिलहाल यह चालू नहीं है। इस संबंध में नगर निगम और फायर विभाग को लिखकर भेजा गया है तथा सिस्टम को जल्द चालू करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। पाइप, नोजल और फायर बॉक्सों की खराब स्थिति के संबंध में एसएमओ ने कहा कि अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में लोग आते हैं और कई बार शरारती तत्व सामान चोरी करके ले जाते हैं।
 
इस संबंध में पुलिस को भी कई बार सूचित किया गया है। फायर एनओसी के बारे में उन्होंने कहा कि इसके लिए आवेदन किया गया है, लेकिन एनओसी जारी हुई है या नहीं, इसकी पूरी जानकारी अभी उनके पास नहीं है। अब सवाल यह है कि लाखों रुपये की लागत से लगाया गया फायर सेफ्टी सिस्टम पूरी तरह कब चालू होगा और अस्पताल में आने वाले मरीजों, उनके परिजनों तथा स्टाफ की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी इंतजाम कब तक सुनिश्चित किए जाएंगे।
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