
5-day-course-on-stubble-management-begins : बठिंडा। पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, लुधियाना के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), बठिंडा ने ब्लॉक बठिंडा के गांव मुल्तानिया में डिप्टी डायरेक्टर (सीनियर) डॉ. गुरदीप सिंह सिद्धू की देखरेख में पराली प्रबंधन पर पांच-दिन का विशेष प्रशिक्षण कोर्स शुरू किया।
इस कोर्स में 25 किसानों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए डॉ. गुरदीप सिंह सिद्धू ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र, बठिंडा हर साल पराली प्रबंधन के तहत 4 गांवों को चुनता है और इन गांवों में पराली प्रबंधन की अलग-अलग मशीनों का इस्तेमाल करके प्रदर्शनियां आयोजित करता है, ताकि आस-पास के गांवों के किसान भी पराली प्रबंधन को अपनाने के लिए प्रेरित हों। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान, कृषि विज्ञान केंद्र, बठिंडा के प्रोफेसर (एक्सटेंशन एजुकेशन) डॉ. गुरमीत सिंह ढिल्लों ने कहा कि पराली जलाने से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति, पर्यावरण और इंसानी सेहत पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी द्वारा बताई गई तकनीकों को अपनाकर पराली का सही प्रबंधन किया जा सकता है, जिससे मिट्टी की सेहत बेहतर होती है, ऑर्गेनिक मैटर बढ़ता है और फसल की पैदावार भी बढ़ती है।
उन्होंने स्मार्ट सीडर, सरफेस सीडर, हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, रिवर्सिबल प्लाऊ, ज़ीरो टिल ड्रिल और पराली प्रबंधन की दूसरी मशीनों के काम करने के तरीके, उनके सही इस्तेमाल और आर्थिक फायदों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पराली जलाने के बजाय वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर प्रदूषण-मुक्त पंजाब बनाने में योगदान दें। इस मौके पर कृषि विज्ञान केंद्र, बठिंडा के असिस्टेंट प्रोफेसर (एनिमल साइंस) डॉ. गुरलाल सिंह ने पराली को पशुओं के चारे के तौर पर इस्तेमाल करने की वैज्ञानिक तकनीकों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पराली का सही प्रबंधन करके और पोषण बढ़ाने वाले तरीकों को अपनाकर इसे पशुओं के लिए अच्छे चारे के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे चारे का खर्च कम होता है और पराली जलाने की समस्या भी हल होती है। उन्होंने कहा कि धान की पराली में यूरिया मिलाकर उसकी पोषण क्षमता और पचने की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है।
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