Last Updated: October 2, 2026

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Punjab News: यूरिया घोटाले की जांच के लिए 5 सदस्यीय SIT गठित, कई जगहों पर पुलिस ने की छापेमारी

July 2, 2026

Punjab News: यूरिया घोटाले की जांच के लिए 5 सदस्यीय SIT गठित, कई जगहों पर पुलिस ने की छापेमारी

Punjab Urea Scam : पंजाब में यूरिया घोटाले की जांच अब और तेज हो गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए खन्ना की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। पांच सदस्यीय यह टीम पूरे मामले की गहराई से जांच करेगी और कथित घोटाले से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल करेगी। साथ ही, पुलिस की टीमें आरोपियों की तलाश में लगातार अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर रही हैं।

पांच सदस्यीय SIT को सौंपी गई जांच

पुलिस प्रशासन की ओर से गठित एसआईटी में एक पुलिस अधीक्षक (SP), तीन उप पुलिस अधीक्षक (DSP) और एक थाना प्रभारी (SHO) को शामिल किया गया है। जांच दल को यूरिया की खरीद से लेकर उसकी सप्लाई और इस्तेमाल तक की पूरी प्रक्रिया की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कृषि विभाग की शिकायत के बाद दर्ज हुई FIR

यह मामला कृषि विकास अधिकारी की शिकायत के आधार पर दर्ज एफआईआर के बाद सामने आया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि खन्ना के भट्टियां स्थित वेरका के कैटल फीड प्लांट में तकनीकी ग्रेड यूरिया के नाम पर कृषि उपयोग वाला सब्सिडी युक्त यूरिया इस्तेमाल किया गया।

छापेमारी में बड़ी मात्रा में मिला यूरिया

17 जून को कृषि विभाग की टीम ने कैटल फीड प्लांट में निरीक्षण के दौरान छापेमारी की थी। जांच में वहां से 1,340 बैग यूरिया बरामद किए गए, जिन्हें तकनीकी ग्रेड बताया गया था। संदेह होने पर अधिकारियों ने नमूने लेकर उन्हें परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा।

Punjab Urea Scam
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लैब रिपोर्ट में सामने आई अहम जानकारी

प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट में सभी नमूनों में नीम ऑयल की मौजूदगी पाई गई। इससे स्पष्ट हो गया कि यह तकनीकी ग्रेड यूरिया नहीं था, बल्कि किसानों को सरकारी सब्सिडी पर मिलने वाला नीम कोटेड कृषि ग्रेड यूरिया था। तकनीकी ग्रेड यूरिया में नीम ऑयल का उपयोग नहीं किया जाता।

सब्सिडी वाले यूरिया के दुरुपयोग का आरोप

एफआईआर के अनुसार, कृषि उपयोग के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले सब्सिडी वाले यूरिया को कथित रूप से तकनीकी ग्रेड यूरिया के बैग में भरकर कैटल फीड प्लांट तक पहुंचाया गया। आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया के जरिए सरकारी सब्सिडी का गलत इस्तेमाल कर निजी आर्थिक लाभ कमाया गया, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।

अधिकारियों और सप्लाई कंपनियों पर भी जांच की आंच

मामले में कैटल फीड प्लांट के जनरल मैनेजर सहित कई जिम्मेदार अधिकारियों और यूरिया की सप्लाई करने वाली कंपनियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित अनियमितताओं में किन-किन लोगों की संलिप्तता रही और क्या पूरी प्रक्रिया सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई।

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खरीद, टेंडर और वित्तीय लेन-देन की होगी जांच

पुलिस ने संबंधित कानूनों के तहत मामला दर्ज कर लिया है। एसआईटी अब यूरिया की खरीद प्रक्रिया, टेंडर आवंटन, सप्लाई चेन, दस्तावेजों की जांच और वित्तीय लेन-देन का विस्तृत ऑडिट करेगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान यदि नए तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

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