
मोगा: धान की पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण पर रोक लगाने और पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन मोगा ने अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। इसी कड़ी में पराली प्रबंधन की जमीनी स्थिति का जायजा लेने के लिए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) की उच्चस्तरीय तकनीकी टीम ने मोगा जिले का दौरा किया। टीम ने पराली जलाने के लिहाज से संवेदनशील गांवों का निरीक्षण किया और किसानों से सीधा संवाद कर उन्हें फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने तथा पराली को आग लगाने से बचने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान जिला प्रशासन की ओर से पराली प्रबंधन के लिए किए जा रहे प्रयासों, कृषि मशीनरी की उपलब्धता और निगरानी व्यवस्था की भी समीक्षा की गई।
टीम में कमीशन के तकनीकी सदस्य डॉ. टीएस पंवार और वैज्ञानिक-सी डॉ. धनंजय कुमार शामिल थे। अधिकारियों ने किसानों को समझाया कि पराली जलाने से वायु गुणवत्ता प्रभावित होती है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पराली को जलाने के बजाय आधुनिक कृषि तकनीकों और उपलब्ध मशीनरी की मदद से उसका उचित प्रबंधन करें।
ड्रोन और सेंसर से रखी जा रही निगरानी
दौरे के दौरान टीम ने बताया कि पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने के लिए ड्रोन के माध्यम से निगरानी की जा रही है। इसके अलावा, वायु गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए सेंसर भी लगाए गए हैं। किसानों ने पराली जलाने के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता जाहिर करते हुए भरोसा दिया कि वे पराली को आग लगाने के बजाय उसके उचित प्रबंधन को प्राथमिकता देंगे।
प्रशासनिक अधिकारियों के साथ की बैठक
गांवों के दौरे के बाद तकनीकी टीम ने जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर पराली प्रबंधन की तैयारियों और अब तक किए गए कार्यों की समीक्षा की। बैठक में डिप्टी कमिश्नर सागर सेतिया, एसएसपी सरताज सिंह चहल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी उपलब्ध करवाने, सब्सिडी योजनाओं, मशीनों के इस्तेमाल और पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर विस्तार से चर्चा हुई।
इस साल सब्सिडी पर दी गईं 1,214 कृषि मशीनें
डिप्टी कमिश्नर सागर सेतिया ने बताया कि पंजाब सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार जिला प्रशासन का लक्ष्य पराली जलाने की घटनाओं को न्यूनतम स्तर पर लाकर शून्य तक पहुंचाना है। किसानों की मांग के अनुसार इस वर्ष सब्सिडी पर 1,214 आधुनिक कृषि मशीनें किसानों और सहकारी सभाओं को उपलब्ध करवाई गई हैं। इन मशीनों की मदद से फसल अवशेषों का खेतों में ही उचित प्रबंधन करने में सहायता मिल रही है। अब तक जिले के निजी किसानों, कस्टम हायरिंग सेंटरों (सीएचसी), सहकारी सभाओं और ग्राम पंचायतों को कुल 4,480 पर्यावरण अनुकूल कृषि मशीनें उपलब्ध करवाई जा चुकी हैं। इसके अलावा, जिले में उपलब्ध 110 बेलरों के माध्यम से हर साल लगभग 3.10 लाख मीट्रिक टन पराली का प्रबंधन किया जाता है।
पराली जलाने की घटनाओं में आई कमी
डीसी सागर सेतिया ने बताया कि जिला प्रशासन के प्रयासों से मोगा में पराली जलाने की दर्ज घटनाएं वर्ष 2024 में 691 थीं, जो वर्ष 2025 में घटकर 332 रह गईं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष भी घटनाओं में और कमी लाने के लिए किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। कृषि मशीनरी की उपलब्धता बढ़ाने, गांवों में निगरानी मजबूत करने और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पराली प्रबंधन केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि किसानों और समाज की सामूहिक भागीदारी से ही इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। सीएक्यूएम की टीम के दौरे का मुख्य उद्देश्य पराली जलाने पर रोक लगाने, पर्यावरण अनुकूल कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने और वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रशासनिक प्रयासों को और प्रभावी बनाना रहा।
📍 Location: मोगा
मेष: दिन शुभ रहेगा...