जगराओं: सिधवां बेट इलाके के एक नौजवान की जिंदगी अचानक बाढ़ के पानी में बह गई। नौजवान का पानी में बह जाना तो एक हादसा ही था लेकिन पाकिस्तान में उसी हादसे को जासूसी की साजिश बना दिया गया। करीब 32 महीने, अमानवीय यातनाएं, 28 दिन की पाकिस्तानी फौज के रेंजर्स की कस्टडी, अदालत की सजा और लाहौर की सैंट्रल जेल में रहने बाद आखिरकार गांव शेरेवाल निवासी 27 वर्षीय हरविंदर सिंह शनिवार देर रात वाघा बॉर्डर से जिंदा पंजाब लौट आया। उसके साथ उसका दोस्त रतन पाल भी था, जो उसके साथ ही पानी में बहा था।
जानकारी के अनुसार हरविंदर सिंह अपने ससुराल गांव परजीया बिहारीपुर में घर जमाई बनकर रहता था। उसके पिता मुख्तियार सिंह का पहले ही देहांत हो चुका है। करीब 8 साल पहले सिकंदर कौर से शादी के बाद उसके घर में दो बेटे पैदा हुए, जिसमें 6 साल का मनप्रीत सिंह और 5 साल का दिलप्रीत सिंह था। दो एकड़ जमीन और दो दुधारू पशुओं से चलने वाला यह परिवार कभी नहीं जानता था कि एक दिन हरविंदर की गैर मौजूदगी में घर में चूल्हा जलना भी मुश्किल हो जाएगा।

