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‘आप ’सरकार ने बिना किसी नियमित जांच के मजीठिया के खिलाफ मामला दर्ज करके कानून का उल्लंघन किया : शिअद

चंडीगढ़: शिरोमणि अकाली दल ने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार ने पार्टी के वरिष्ठ नेता बिक्रम मजीठिया (Bikram Majithia) के खिलाफ बिना किसी नियमित जांच के आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज करके कानून का उल्लंघन किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उन्हें चुप कराने के साथ-साथ ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ अभियान की विफलता से ध्यान हटाने के लिए राजनीतिक बदलाखोरी में लिप्त है।

बलविंदर सिंह भूंदड़, महेशइंदर सिंह ग्रेवाल और डा. दलजीत सिंह चीमा ने आप सरकार पर पंजाबियों को गुमराह करने और अदालत की अवमानना करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मजीठिया को 540 करोड़ रुपए के ड्रग मामले में गिरफ्तार किया गया है। यह सिर्फ बेतुका ही नहीं कोरा झूठ बोला गया है। जिसके लिए आप नेताओं को जवाबदेह ठहराया जाएगा।

मजीठिया का परिवार एक पुराना जमींदार परिवार है
उन्होंने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि उसने एफआईआर या अन्य में मनगढ़ंत 540 करोड़ रुपए के आंकड़े के संबंध में एक भी शिकायत जारी क्यों नहीं की? उन्होंने कहा कि इसके विपरीत जब दिल्ली शराब घोटाले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया गया तो शराब ठेकेदारों की ओर से स्पष्ट शिकायतें आई थी कि उन्होंने दोनों को रिश्वत के पैसे दिए थे। ग्रेवाल ने कहा कि सरकारी वकील ने कहा है कि मजीठिया के खिलाफ केवल आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि यह भी मनगढ़ंत है। शिकायत में बताई गई संपत्तियां बिक्रम मजीठिया के जन्म से पहले भी मजीठिया परिवार के पास थी। उनका परिवार एक पुराना जमींदार परिवार है। उनके दादा के पास विमान और यहां तक कि रोल्स रॉयस कार भी थी।

पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने बिक्रम मजीठिया किया गिरफ्तार
पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने बुधवार को शिरोमणि अकाली दल के नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया को अमृतसर स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया था। उन पर 540 करोड़ रुपए से अधिक की ड्रग मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। विशेष जांच टीम (SIT) और विजिलेंस ब्यूरो की जांच में पता चला कि मजीठिया ने बड़े पैमाने पर ड्रग मनी की हेरा फेरी की। प्रारंभिक जांच के अनुसार, 161 करोड़ रुपए की नकदी मजीठिया द्वारा नियंत्रित कंपनियों के बैंक खातों में जमा की गई, 141 करोड़ रुपए संदिग्ध विदेशी संस्थाओं के जरिए भेजे गए और 236 करोड़ रुपए बिना किसी घोषणा या स्पष्टीकरण के कंपनी के वित्तीय विवरणों में जमा किए गए।

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