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मवेशियों को गोशालाओं में भेजने की मुहिम तेज करने के निर्देश

जालंधर। पंजाब गोसेवा आयोग के उपाध्यक्ष कीमती भगत ने जिला प्रशासन और गोशालाओं के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर आवारा मवेशियों की देखभाल और सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सड़कों पर घूम रहे मवेशियों को गौशालाओं में भेजने की प्रक्रिया तेज करने तथा मवेशियों को सड़कों पर छोड़ने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और जुर्माने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि पिछले चार महीनों में प्रदेश में करीब 10 हजार आवारा मवेशियों को गौशालाओं में भेजा गया है।

यहां ज़िला प्रशासनिक परिसर में अतिरिक्त उपायुक्त (शहरी विकास) अमरजीत बैंस के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए, उपाध्यक्ष कीमती भगत ने कहा कि ज़िले में आवारा मवेशियों की सही देखभाल करके कीमती जानें बचाई जा सकती हैं, ट्रैफ़िक की समस्याओं को हल किया जा सकता है और किसानों की फ़सलों को होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है। उन्होंने सड़कों पर घूम रहे आवारा मवेशियों को गौशालाओं में भेजने के प्रयास तेज़ करने के निर्देश दिए।

उन्होंने नगर निगमों और परिषदों को निर्देश दिया कि वे ऐसे आवारा मवेशियों को सरकारी या निजी गौशालाओं में भेजना सुनिश्चित करें। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि वे शहर में गायों को छोड़ने वालों के ख़िलाफ़ म्युनिसिपल एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई करें और जुर्माना लगाएँ, ताकि लोगों को इन बेज़ुबान जानवरों को सड़कों पर छोड़ने से रोका जा सके।
उपाध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री एस. भगवंत मान के निर्देशों के अनुसार, आवारा मवेशियों की उचित देखभाल सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि आयोग ने आवारा मवेशियों को गौशालाओं में भेजने के लिए एक अभियान शुरू किया है; इस पहल के तहत—जिसमें पूरे राज्य में बैठकें करना शामिल है—पिछले चार महीनों में लगभग 10,000 आवारा मवेशियों को गौशालाओं में भेजा गया है। उन्होंने पशुपालन विभाग के उप-निदेशक को निर्देश दिया कि वे उन गौशालाओं के मामले तैयार करके आयोग को सौंपें जिनके बिजली बिल अभी तक माफ़ नहीं किए गए हैं, और यह सुनिश्चित करें कि यह काम जल्द पूरा हो।

इसके अलावा इन आश्रय स्थलों में पशु चिकित्सकों की उपलब्धता, मवेशियों का ज़रूरी टीकाकरण और घायल या बीमार जानवरों का उचित इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। कीमती भगत ने राज्य की सभी 518 सरकारी और प्राइवेट गौशालाओं का बिजली बिल माफ़ करने के लिए पंजाब सरकार का आभार जताया। उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार ने घायल मवेशियों के इलाज में आसानी के लिए सभी प्राइवेट और सरकारी गोशालाओं को ₹3.6 करोड़ की लागत से ‘काऊ लिफ्टर’ (मवेशियों को उठाने वाली मशीन) भी उपलब्ध कराए हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ही मवेशियों की देखभाल के लिए समर्पित गौशालाओं को प्रति जानवर ₹61 प्रतिदिन के हिसाब से फंड जारी करेगी—जिसमें चारे और रखरखाव का खर्च शामिल होगा—जिससे इन आश्रय स्थलों को और राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि ‘पंजाब गो-वध निषेध (संशोधन) अधिनियम, 2011’ के तहत पंजाब में गो-वध, गो-तस्करी और बीफ़ से जुड़ी गैर-कानूनी गतिविधियों के लिए 10 साल तक की सज़ा का प्रावधान है। इसके अलावा, सभी ज़िलों में गो-संरक्षण सेल भी स्थापित किए गए हैं।

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