अमृतसर: निगम के एडीशनल कमिश्नर सुरिंदर सिंह ने जल एवं सीवरेज विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की गई। बैठक में विभाग की कारगुजारी की समीक्षा कर वसूली एवं जांच के दिए गए लक्ष्यों के संबंध में जानकारी ली गई। उन्होंने जोन-2 के अंतर्गत दिए गए वसूली लक्ष्यों को पूरा न करने तथा दिए गए नोटिसों की समाप्ति के बाद कनेक्शन काटने की कार्रवाई न करने पर नाराजगी व्यक्त की तथा निर्देश दिए कि लक्ष्यों को हर हाल में पूरा किया जाए तथा अवैध जल एवं सीवरेज कनेक्शन वाले व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के कनेक्शन काटे जाएँ।
उन्होंने कहा कि निगम की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए जोन-2 में कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों को जल एवं सीवरेज विभाग की वसूली बढ़ाने और करोड़ों रुपए के बकाया का भुगतान करने के लिए लक्ष्य दिए गए हैं। इसके अलावा, उन्हें अवैध जल एवं सीवरेज कनेक्शनों, विशेष रूप से व्यापारिक प्रतिष्ठानों की जांच करने के लिए भी कहा गया है। यह भी कहा गया है कि जिन व्यापारिक प्रतिष्ठानों ने कनेक्शन ले लिए हैं, उन्हें उनके द्वारा की जा रही खपत के अनुसार बिल भेजे जाएं।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 के दौरान विभाग का कुल लक्ष्य 15 करोड़ था, जिसमें से अक्टूबर तक 3.33 करोड़ रु पए की वसूली की जा चुकी थी, जबकि इस वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान विभाग द्वारा 16 करोड़ रु पए के मुकाबले 6.75 करोड़ रु पए की वसूली की जा चुकी है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3.42 करोड़ रु पए अधिक है। इसके अलावा, विभाग द्वारा लगभग 630 व्यापारिक प्रतिष्ठानों को नोटिस दिए गए हैं, जिसके संबंध में विभाग द्वारा कार्रवाई की जा रही है और वसूली की जा रही है। इसी कड़ी में बुधवार को दक्षिणी जोन के वार्ड नंबर 38 में अवैध कनैक्शनों के खिलाफ दिए गए नोटिसों की अवधि समाप्त होने के बाद विभाग ने कोट मीत सिंह में पानी व सीवरेज के कनेक्शन काटने की कार्रवाई की है।
उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक जेई अपने-अपने क्षेत्न में दिए गए नोटिसों की अवधि समाप्त होने के बाद एक सप्ताह में 5 कनेक्शन काटने की कार्रवाई करेगा। प्रत्येक कॉलोनी में नोटिस देते समय कोई भेदभाव न किया जाए और एक कॉलोनी में सभी अवैध कनेक्शनों के लिए नोटिस दिए जाएं और इसके साथ ही ऐसी कॉलोनियों में कैंप लगाए जाएं ताकि लोग अपने पानी व सीवरेज के कनेक्शन नियमित करवा सकें और कैंप से 4 दिन पहले विभाग व कॉलोनी वासियों को सूचित किया जाए। सभी एसडीओ को निर्देश दिए गए हैं कि वे एक सप्ताह में 10 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच करें और उनके द्वारा की जा रही खपत के अनुसार बिल भेजने की प्रक्रि या अमल में लाई जाए।

