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पराली जलाने पर सख्ती, कई गांवों में छापेमारी और गश्त

Administration Intensifies Crackdown on Stubble Burning : अमृतसर। जिले में पराली और फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए, डिप्टी कमिश्नर राहुल के निर्देशों पर वरिष्ठ अधिकारी अपनी-अपनी टीमों के साथ विभिन्न गांवों में लगातार गश्त कर रहे हैं।

इस पहल के तहत, कृषि और पुलिस विभागों की संयुक्त टीमों ने तरनतारन के SDM डॉ. करणवीर सिंह, खदूर साहिब के SDM संजीव शर्मा, पट्टी के SDM अमनदीप, भिखीविंड के SDM जगदीप सिंह, मुख्य कृषि अधिकारी तेजबीर सिंह भंगू और अन्य अधिकारियों के नेतृत्व में कई गांवों में गश्त की। इस दौरान पराली जलाने से रोकने के लिए कार्रवाई की गई और जो आग पहले ही लग चुकी थी, उसे मौके पर ही बुझा दिया गया। कुछ जगहों पर आग बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड की भी मदद ली गई।

इस बीच, टीमों ने शहीद, बोपाराई, धगाना, घरियाला, मन्नन, सरहाली कलां, सभरा, ज्योतिशाह, कोट बुड्ढा, डुबली, धोतियां, रानीवाला, मारी गौर सिंह, डिब्बीपुरा, सुरविंड, चोहला साहिब और कच्चा पक्का सहित कई गांवों का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया। इस मौके पर अधिकारियों ने बताया कि प्रशासन पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जागरूकता अभियानों और सख्त कानूनी कार्रवाई—दोनों का सहारा ले रहा है; कई मामले भी दर्ज किए गए हैं। उन्होंने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए फसल अवशेष न जलाएं, बल्कि इसके सही प्रबंधन के लिए कृषि मशीनों का उपयोग करें।

उन्होंने बताया कि फसल अवशेष (पराली) जलाने से जमीन की उपजाऊ क्षमता पर बुरा असर पड़ता है और मिट्टी में मौजूद फायदेमंद कीड़े और सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं। इससे मिट्टी की सेहत और पर्यावरण दोनों को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे पराली को जलाने के बजाय खेतों में ही उसका प्रबंधन करें, या ‘बेलिंग मशीन’ (baler) जैसी कृषि मशीनों का उपयोग करके पराली के गट्ठर (bales) बनवाएं और उसका सही इस्तेमाल करें।

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