जालंधर : लतीफपुरा इलाके में मंगलवार सुबह ज़िला प्रशासन की ओर से पिछले कई वर्षों से चले आ रहे विवादित 10 कनाल 17 मरले जमीन के कब्ज़ों को खाली करवाने के लिए सुनियोजित ढंग से व्यापक कार्रवाई को अंजाम दिया गया। सुबह तड़के ही प्रशासनिक अधिकारी, भारी पुलिस बल और नगर निगम की टीमें मौके पर पहुंच गईं। कार्रवाई के दौरान बुलडोज़र और अन्य मशीनरी की मदद से अवैध निर्माणों को हटाया गया। फिलहाल जमीन प्रशासन के कब्जे में बताई जा रही है, लेकिन विरोध थमता नजर नहीं आ रहा। हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई के बाद इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद की दिशा और स्पष्ट हो सकेगी।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई सरकारी भूमि को कब्ज़ा मुक्त कराने के लिए की गई। अधिकारियों का कहना है कि संबंधित लोगों को पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके थे और कई बार स्वयं कब्ज़ा हटाने का अवसर भी दिया गया था। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह कदम न्यायालय के दिशा-निर्देशों और कानूनी प्रक्रि या के तहत उठाया गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकारी ज़मीन पर अवैध कब्ज़ों के कारण विकास परियोजनाएं प्रभावित हो रही थीं, जिसके चलते यह सख्त कदम उठाना आवश्यक हो गया। संवेदनशीलता को देखते हुए मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए दंगा-रोधी दस्ते और महिला पुलिस कर्मियों को भी तैनात किया गया।
हाईकोर्ट की तारीख वाले दिन की गई बड़ी कार्रवाई : मंगलवार को इस मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई निर्धारित थी, जिसमें जालंधर इंप्रूवमैंट ट्रस्ट को जमीन की स्थिति और कब्जे संबंधी जवाब दाखिल करनी थी। इससे पहले ही प्रशासन ने पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए मौके पर कब्जा लेने की प्रक्रि या पूरी कर ली। सूत्नों के अनुसार, 2022 की कार्रवाई से सबक लेते हुए इस बार प्रशासन ने बाहरी समर्थन को रोकने के लिए इलाके के चारों ओर पहले से ही बैरिकेडिंग कर दी थी। किसी भी बाहरी व्यक्ति को विवादित स्थल के नजदीक नहीं जाने दिया गया।