Administration Tightens Vigil on Stubble Burning : फरीदकोट। धान की पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन ने निगरानी तेज कर दी है। डिप्टी कमिश्नर राहुल छाबा ने एसडीएम और कृषि विभाग के अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहने, गांवों का दौरा करने और किसानों को जागरूक करने के निर्देश दिए हैं। सैटेलाइट से आग लगने का पता चलने पर संबंधित स्थान की 24 घंटे के भीतर दोबारा जांच करनी होगी। प्रशासन ने किसानों को कृषि मशीनरी, सब्सिडी वाले बीज और खाद उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया।
क्लस्टर तथा नोडल अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी अपने कर्तव्यों के पालन में किसी भी तरह की लापरवाही न बरते। उन्होंने निर्देश दिया कि क्लस्टर और नोडल अधिकारी यथासंभव फील्ड में तैनात रहें। उन्होंने आगे कहा कि प्रभावी अवशेष प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करते हुए, अधिकारियों को गांवों का दौरा करना चाहिए और किसानों को फसल अवशेष न जलाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने निर्देश दिया कि जिन जगहों पर पराली जलाई जाती है, उनकी पुष्टि ‘भुवन’ (Bhuvan) ऐप के जरिए की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिन जगहों पर सैटेलाइट के माध्यम से आग लगने का पता चलता है, उनकी 24 घंटे के भीतर दोबारा जांच की जानी चाहिए। उन्होंने मुख्य कृषि अधिकारी को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि किसानों को डीएपी (खाद) और सब्सिडी वाले बीज उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिन किसानों को ओलावृष्टि के कारण नुकसान हुआ है, उन्हें ये चीजें प्राथमिकता के आधार पर दी जानी चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को स्कूलों में फसल अवशेष (पराली) न जलाने के विषय पर क्विज़ प्रतियोगिताएं और पोस्टर बनाने जैसी गतिविधियां आयोजित करने का निर्देश दिया, जिससे कि बच्चे अपने माता-पिता और आसपास के लोगों के बीच जागरूकता फैला सकें।
सहायक विपणन अधिकारी डॉ. गुरप्रीत सिंह ने बताया कि फरीदकोट जिले में लगभग 1.16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान और बासमती की फसल बोई गई है, जिससे 7.45 लाख टन फसल अवशेष (पराली) निकलने का अनुमान है। इसमें से 2.50 लाख मीट्रिक टन बायोमास का उपयोग विभिन्न तरीकों से किया जाएगा, जबकि बाकी बची पराली का इस्तेमाल अलग-अलग उद्योगों में किया जाएगा। उन्होंने बताया कि क्लस्टर/नोडल अधिकारियों ने सहकारी समितियों के सचिवों के साथ मिलकर इन समितियों के सदस्यों के साथ बैठकें की हैं, ताकि पराली प्रबंधन के प्रयासों में उनका अधिकतम सहयोग मिल सके।
उन्होंने डिप्टी कमिश्नर को बताया कि किसानों को पराली का उपयोगी इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से, गाँव और ब्लॉक स्तर पर किसान प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इस मौके पर उन्होंने ‘उन्नत किसान’ ऐप के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह ऐप किसानों के लिए बहुत फायदेमंद है, क्योंकि इसके जरिए वे अपने गाँव या आस-पास के गाँवों में उपलब्ध सभी कृषि मशीनों की जानकारी ले सकते हैं; इतना ही नहीं, वे सीधे ऐप के माध्यम से इन मशीनों को बुक भी कर सकते हैं। किसान इस ऐप को “agrimachinerypb.com” से डाउनलोड कर सकते हैं।

