अमृतसर Ajnala: 2 हफते से ज्यादा पंजाब जलप्रलय व तेज बारिश का दंश ङोल रहा है। अब अफ्रीकी स्वाइन फ्लू का प्रकोप शुरू हो गया है, जिससे पंजाबियों को काफी मुश्किल में डाल दिया है। अमृतसर के अजनाला, तहसील धारीवाल कलेर गांव में ‘अफ्रीकी स्वाइन फ्लू’ का प्रकोप फैल गया है, जिसके कारण जिला प्रशासन के भी हाथ पैर फुल गए है। प्रशासन की तरफ से इस गांव के 1 किलोमीटर से 10 किलोमीटर के पड़ते इलाके को नो जोन घोषित कर दिया है।
प्रशासन ने इस क्षेत्र से जीवित/मृत सूअरों, सूअर के मांस या सूअर के मांस से बने उत्पादों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है ताकि यह बीमारी बाहर न फैल सके। एडीसी रोहित गुप्ता ने कहा कि इन इलाकों से सूअर के मीट व उससे बनी वस्तुओं पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है और वहां पर रह रहे सुअरों को भी इन जगहों से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा, जिसके लिए पशुपालन विभाग के अधिकारियों की ड्यूटी लगा दी गई है। अगर कोई व्यक्ति इस आदेशों का पालन नहीं करेगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने 9 नवंबर 2025 तक इस इलाके को नो जोन घोषित कर दिया गया है।
अब तक पंजाब में कब-कब फैला स्वाइन फ्लू
पंजाब में स्वाइन फ्लू सबसे पहले 2009 में फैला था। इसके बाद 2015-16, 2017, 2018, 2019 और हाल ही में 2022-23 के दौरान बार-बार देखने को मिलीं। इसका प्रकोप आम तौर पर सर्दियों के मौसम में ज्यादा होता है और एक-एक लहर करीब दो-तीन महीने तक रहती है, कभी-कभी यह अवधी लंबी भी रही है। पंजाब में अब तक 100 से ज्यादा लोगों की मौत स्वाइन फ्लू से हो चुकी है।
बाढ़ पीड़ितों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के संबंध में सिविल सर्जन ने सीनियर मैडीकल अधिकारियों के साथ की विशेष बैठक
सिविल सर्जन डॉ. गुरप्रीत सिंह राय ने बाढ़ प्रभावित लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के संबंध में सिविल सर्जन तरनतारन के कार्यालय में एक विशेष बैठक की गई। जिस में जिले के सभी सीनियर मेडिकल अधिकारियों और ब्लॉक एजुकेटरों ने भाग लिया। सिविल सर्जन डॉ. गुरप्रीत सिंह राय ने कहा कि बाढ़ से बचाव के संबंध में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी प्रकार के प्रबंध किए गए हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा स्वास्थ्य सुविधाओं के संबंध में भी समुचित प्रबंध किए गए हैं। इस संबंध में, सिविल सर्जन डॉ. राय ने कहा कि ब्लॉक मियाविंड, सरहाली, घरियाला और खेमकरण क्षेत्रों में चिकित्सा शिविर में सहायता दल लगातार स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बाढ़ के दौरान जल जमाव से होने वाली बीमारियों के खतरों से बचने के लिए सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। डॉ. गुरप्रीत सिंह राय ने कहा कि दूषित पानी से हैजा, डायरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया, पीलिया, त्वचा रोग आदि बीमारियां हो सकती हैं। उन्होंने जिलावासियों से अपील की कि वे स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी गई सलाह का पालन करें और समस्या के संबंध में चिकित्सा सहायता शिविरों से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि संक्रामक रोगों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए पीने के लिए स्वच्छ पानी का उपयोग किया जाना चाहिए। पीने के पानी को उपयोग से पहले उबालकर ठंडा किया जाना चाहिए। बीमारियों से बचने के लिए साफ-सफाई बनाए रखें और साबुन से हाथ धोते रहें, ताकि होने वाली बीमारियों से बचा जा सके। इस संबंध में डॉ. राय ने आम जनता से अपील की कि यदि किसी को भी डायरिया, हैजा, टाइफाइड, उल्टी, डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया या खुजली जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, तो वे बाढ़ के दौरान लगाए गए चिकित्सा सहायता शिविरों या सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में जाकर अपना इलाज पूरी तरह से मुफ्त करवाएं।

