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भोगला में श्मशानघाट और कब्रिस्तान के लिए आरक्षित दो बीघे से अधिक जमीन बेचने का आरोप

पटियाला : राजपुरा के बाहरी इलाके में स्थित भोगला गांव में मृतकों के अंतिम संस्कार और दफन के लिए आरक्षित जमीन की कथित बिक्री ने गांव की व्यवस्था और राजस्व रिकॉर्ड पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी दस्तावेजों में दर्ज है कि विभिन्न धर्मों और समुदायों के मृतकों के अंतिम संस्कार व दफन के लिए गांव के पूर्वजों द्वारा 11 बीघे से अधिक जमीन दान की गई थी जिसमें से करीब दो बीघे से ज्यादा बेशकीमती जमीन को दो व्यक्तियों ने अपनी पैतृक संपत्ति बताकर कथित तौर पर बेच दिया।

औद्योगिक क्षेत्र में स्थित इस जमीन की बाजार कीमत स्थानीय निवासियों के मुताबिक करीब 50 से 60 हजार रुपए प्रति वर्ग गज है। यही वजह है कि ग्रामीण इस पूरे मामले को महज जमीन के लेन-देन का मामला नहीं, बल्कि सार्वजनिक उपयोग के लिए रखी गई जमीन पर कथित कब्जे और बिक्री का गंभीर मामला बता रहे हैं। ग्रामीणों सरदूल सिंह, गुरचरण सिंह, गुरदास सिंह, विशाल शर्मा, मियां खान, सितार मोहम्मद सहित अन्य ने आरोप लगाया कि गांव के पूर्वजों ने अलग-अलग धर्मों और समुदायों के मृतकों के अंतिम संस्कार तथा दफन के लिए 11 बीघे से अधिक जमीन दान की थी।

ग्रामीणों का सवाल है कि यदि जमीन वास्तव में सार्वजनिक उपयोग के लिए थी तो इसे निजी पैतृक संपत्ति बताकर बिक्री तक मामला कैसे पहुंचा? मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब ग्रामीण दर्शन सिंह ने आरोप लगाया कि विवादित जमीन से धार्मिक स्थल और खेतों तक जानेवाला सांझा रास्ता भी कथित तौर पर बेच दिया गया। उनका कहना है कि यह रास्ता राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है। ग्रामीणों ने मांग की है किजमीन के साथ-साथ रास्ते के रिकॉर्ड और बिक्री दस्तावेजों की भी गहन जांच की जाए।

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