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गायत्री बिश्नोई पर खैहरा की टिप्पणियों को लेकर अमनदीप अरोड़ा का बयान, कहा- राजनीतिक बहस में मर्यादा जरूरी

मोगा: कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा की ओर से आम आदमी पार्टी की स्टेट ऑब्जर्वर गायत्री बिश्नोई को लेकर की गई टिप्पणियों के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। इस मामले में मोगा की विधायक डॉ. अमनदीप कौर अरोड़ा ने खैहरा की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी भी महिला के सम्मान और गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं है।

विधायक डॉ. अमनदीप कौर अरोड़ा ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों और नेताओं के बीच विचारों का मतभेद होना स्वाभाविक है। किसी की नीतियों, कार्यशैली या राजनीतिक फैसलों पर सवाल उठाए जा सकते हैं, लेकिन राजनीतिक विरोध करते समय भाषा की मर्यादा बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक बहस तथ्यों और तर्कों के आधार पर होनी चाहिए, न कि किसी महिला की व्यक्तिगत गरिमा को निशाना बनाकर।

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डॉ. अरोड़ा ने कहा कि गायत्री बिश्नोई अभी महज 24 वर्ष की हैं और युवा महिलाओं का राजनीति तथा सार्वजनिक जीवन में आगे आना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि समाज और राजनीतिक दल महिलाओं को सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं तो उनके लिए सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना भी सभी की जिम्मेदारी है।

विधायक ने कहा कि महिलाओं को लेकर सार्वजनिक मंचों पर की जाने वाली टिप्पणियों में विशेष रूप से संयम और मर्यादा बरतने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी महिला की निजी जिंदगी को राजनीतिक बहस का विषय बनाने के बजाय संबंधित मुद्दों पर तथ्यात्मक चर्चा होनी चाहिए।

डॉ. अरोड़ा ने यह भी कहा कि गायत्री बिश्नोई की ओर से अपने पिता के इलाज के संबंध में स्थिति स्पष्ट की जा चुकी है और उन्होंने बताया है कि वह अपने माता-पिता के साथ इलाज के सिलसिले में डॉ. बलबीर सिंह के सरकारी आवास पर रह रही थीं। विधायक ने कहा कि ऐसे मामले में व्यक्तिगत टिप्पणियों के बजाय उपलब्ध तथ्यों को ध्यान में रखकर ही बात की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि महिलाओं का सम्मान किसी एक राजनीतिक दल या संगठन का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। सार्वजनिक जीवन में सक्रिय प्रत्येक महिला को सम्मान और अपनी बात रखने का समान अवसर मिलना चाहिए।

डॉ. अरोड़ा ने कहा कि राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन विरोध की भाषा ऐसी होनी चाहिए जो लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक मर्यादा के अनुरूप हो। उन्होंने दोहराया कि राजनीतिक असहमति के बावजूद महिलाओं के सम्मान और गरिमा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

📍 Location: मोगा

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