
अमृतसर: राष्ट्रीय पुलिस शहीदी दिवस के अवसर पर अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस की ओर से पुलिस लाइन स्थित शहीदी स्मारक पर श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान देश और समाज की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले बहादुर पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। कार्यक्रम में शहीद पुलिसकर्मियों के 121 परिवारों के सदस्य, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, कर्मचारी और समाजसेवी शामिल हुए।
पुलिस कमिश्नर अमृतसर हरमनबीर सिंह गिल (IPS) ने शहीदों को नमन करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और लोगों की जान-माल की रक्षा के लिए पुलिसकर्मियों का बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने शहीद परिवारों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उनके साथ खड़े रहने का भरोसा भी दिलाया।
शहीदी स्मारक पर दी गई सलामी
अमृतसर पुलिस लाइन स्थित शहीदी स्मारक पर आयोजित कार्यक्रम में ACP एयरपोर्ट स्पिंदर कौर की कमान में पुलिस टुकड़ी ने शहीद जवानों को शोक सलामी दी। इसके बाद पुलिस कमिश्नर हरमनबीर सिंह गिल सहित अधिकारियों और कर्मचारियों ने शहीदी स्मारक पर पुष्प अर्पित कर वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम में समाजसेवी लक्ष्मी कांता चावला और पंजाब पुलिस पेंशनर्स वेलफेयर के अध्यक्ष सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर शमशेर सिंह भी उपस्थित रहे। समारोह का मुख्य उद्देश्य देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए पुलिसकर्मियों के योगदान को याद करना और उनके परिवारों के प्रति सम्मान प्रकट करना था।
121 शहीद जवानों के परिवार हुए शामिल
श्रद्धांजलि समारोह में कमिश्नरेट पुलिस अमृतसर के 121 शहीद जवानों के परिजनों ने भाग लिया। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने शहीद परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और उनके बलिदान को नमन किया।
पुलिस कमिश्नर ने कहा कि शहीदों के परिवार पुलिस विभाग का अभिन्न हिस्सा हैं। उनकी समस्याओं को सुनना, जरूरतों को समझना और हर संभव सहायता उपलब्ध करवाना पुलिस प्रशासन की नैतिक एवं सामाजिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि शहीदों के परिजनों का सम्मान करना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उनके त्याग और बलिदान के प्रति सच्ची कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है।
एक साल में 154 पुलिस और अर्धसैनिक जवान शहीद
समारोह के दौरान ACP नॉर्थ गगनदीप सिंह ने 1 सितंबर 2025 से 31 अगस्त 2026 तक ड्यूटी के दौरान शहीद हुए अर्धसैनिक बलों और विभिन्न राज्यों की पुलिस के 154 जवानों के नाम पढ़कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
इस अवसर पर पुलिस कमिश्नर ने कहा कि यह आंकड़ा याद दिलाता है कि देश की सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा करते हुए सुरक्षा बलों के जवानों को कितनी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। वे अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए कई बार सर्वोच्च बलिदान देने से भी पीछे नहीं हटते।
21 अक्टूबर को क्यों मनाया जाता है शहीदी दिवस?
पुलिस शहीदी दिवस का इतिहास 21 अक्टूबर 1959 से जुड़ा है। उस दिन लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में सीमा पर गश्त कर रही भारतीय पुलिस की एक टुकड़ी पर चीनी सैनिकों ने घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में 10 भारतीय पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे।
इन बहादुर जवानों की स्मृति में वर्ष 1960 से हर साल 21 अक्टूबर को देशभर में पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है। इस दिन देश और समाज की रक्षा करते हुए अपनी जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों को याद किया जाता है।
पुलिस कमिश्नर ने कहा कि यह दिवस केवल शहीदों को श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं है, बल्कि उनकी बहादुरी, अनुशासन और कर्तव्य के प्रति समर्पण से प्रेरणा लेने का भी दिन है।
पुलिस की वर्दी जिम्मेदारी और सेवा का प्रतीक
हरमनबीर सिंह गिल ने कहा कि पुलिस की वर्दी केवल पहचान नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा, कानून का पालन, न्याय और समाज के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों से साहस, ईमानदारी, अनुशासन और निष्पक्षता की अपेक्षा की जाती है। शहीद जवानों का जीवन हमें सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य को पूरी निष्ठा से निभाना चाहिए।
उन्होंने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील की कि वे शहीदों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर जनता की सेवा और सुरक्षा के लिए और अधिक समर्पण के साथ काम करें। साथ ही, पुलिस और आम जनता के बीच विश्वास को मजबूत करने पर भी जोर दिया।
शहीदों की कुर्बानी हमेशा रहेगी याद
अमृतसर में आयोजित पुलिस शहीदी दिवस समारोह शहीद जवानों की बहादुरी, कर्तव्यनिष्ठा और देश के प्रति समर्पण को समर्पित रहा। कार्यक्रम के माध्यम से पुलिस विभाग ने शहीद परिवारों के प्रति अपना सम्मान और सहयोग का संकल्प दोहराया।
समारोह में यह संदेश दिया गया कि शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब उनके दिखाए रास्ते पर चलते हुए देश, समाज और आम नागरिकों की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।